lekhpal rural society & development mock test in hindi
उत्तर प्रदेश लेखपाल मुख्य परीक्षा की तैयारी कर रहे सभी अभ्यर्थियों का InsuVantage पर हार्दिक स्वागत है। जैसा कि आप सभी जानते हैं, लेखपाल भर्ती परीक्षा के सिलेबस में ‘ग्रामीण समाज एवं विकास’ एक ऐसा विषय है जो सबसे अधिक स्कोरिंग होने के साथ-साथ सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण भी माना जाता है। बहुत से छात्र हिंदी, गणित और सामान्य ज्ञान में तो महारत हासिल कर लेते हैं, लेकिन ग्रामीण परिवेश के प्रश्नों में अक्सर गड़बड़ कर बैठते हैं। इसका मुख्य कारण इस विषय के दायरे का बहुत बड़ा होना और भूमि पैमाइश जैसे तकनीकी आंकड़ों का सटीक ज्ञान न होना है।
ग्रामीण परिवेश के इस भाग में आपसे न केवल केंद्र और राज्य सरकार की महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजनाओं के बारे में पूछा जाता है, बल्कि राजस्व प्रशासन, लेखपाल के कार्य, उत्तर प्रदेश का कृषि परिदृश्य और प्राचीन काल से चली आ रही भूमि मापन पद्धतियों (जैसे जरीब, बीघा, बिस्वा) से भी सवाल पूछे जाते हैं। परीक्षा के बदलते पैटर्न को देखते हुए अब केवल किताबी ज्ञान काफी नहीं है; आपको उन ‘एवरग्रीन’ सवालों का अभ्यास करना होगा जो बार-बार यूपीएसएसएससी (UPSSSC) द्वारा पूछे जाते हैं। lekhpal rural society & development mock test in hindi
आपकी इसी समस्या का समाधान करने के लिए हमने आज के इस UP Lekhpal Rural Development Mock Test को तैयार किया है। इस टेस्ट में हमने पंचायती राज व्यवस्था, राजस्व न्यायालय, ग्रामीण स्वास्थ्य योजनाएं और कृषि सांख्यिकी के 25 अति-महत्वपूर्ण प्रश्नों को शामिल किया है। प्रत्येक प्रश्न के साथ हमने विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation) भी दी है, ताकि एक प्रश्न हल करने पर आपको उससे जुड़े 3-4 नए तथ्यों की जानकारी मिल सके।
राजस्व लेखपाल जिलाधिकारी (DM) के अधीन कार्य करता है। हालांकि, उसके कार्यों का पर्यवेक्षण कानूनगो और तहसीलदार करते हैं।
उत्तर प्रदेश में एक एकड़ लगभग 1.6 पक्का बीघा के बराबर होता है। वर्ग गज में यह 4840 वर्ग गज होता है।
खसरा और खतौनी को मिलाकर 'अधिकार अभिलेख' (Record of Rights) कहा जाता है। खतौनी में किसान की जोत का विवरण होता है।
73वें संविधान संशोधन अधिनियम के 24 अप्रैल 1993 को लागू होने के उपलक्ष्य में हर साल 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है।
उत्तर प्रदेश में भूलेखों के डिजिटलीकरण का कार्य वर्ष 1987-88 में केंद्र सरकार की सहायता से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुआ था।
जमाबंदी की दो प्रतियां तैयार की जाती हैं। एक प्रति तहसील कार्यालय में रखी जाती है और दूसरी प्रति लेखपाल के पास रहती है।
नॉर्मन बोरलॉग को विश्व में हरित क्रांति का जनक माना जाता है। भारत में हरित क्रांति का श्रेय एम.एस. स्वामीनाथन को जाता है।
एक हेक्टेयर भूमि 2.471 एकड़ के बराबर होती है। मीटर में यह 10,000 वर्ग मीटर के बराबर होती है।
SGSY की शुरुआत 1 अप्रैल 1999 को हुई थी। बाद में इसे 'राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन' (NRLM) में बदल दिया गया।
भारत में ग्राम पंचायत सदस्य या प्रधान का चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित है, जबकि मतदान की आयु 18 वर्ष है।
चकबंदी विभाग का सर्वोच्च अधिकारी 'चकबंदी आयुक्त' होता है, जिसका मुख्यालय लखनऊ में स्थित है।
अमीं का मुख्य उत्तरदायित्व भू-राजस्व (Land Revenue) या सरकारी बकाया की वसूली करना होता है।
ऑपरेशन फ्लड की शुरुआत 1970 में हुई थी। यह दुनिया का सबसे बड़ा डेयरी विकास कार्यक्रम था, जिसके जनक वर्गीज कुरियन थे।
भूमि की वास्तविक दूरियों और कोणों को मापकर उन्हें कागज पर उतारना 'सर्वेक्षण' (Surveying) कहलाता है।
गाँव के मानचित्र या नक्शे को 'सजरा' कहा जाता है। इसमें हर खेत को एक नंबर दिया जाता है।
73वां संविधान संशोधन 1992 पंचायती राज संस्थानों को संवैधानिक दर्जा देने से संबंधित है।
उत्तर प्रदेश में लगभग 2700 से अधिक राजस्व न्यायालय हैं, जिनमें नायब तहसीलदार कोर्ट से लेकर राजस्व परिषद तक शामिल हैं।
NRHM की शुरुआत 12 अप्रैल 2005 को ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए की गई थी।
भूमि मापन में प्रयोग होने वाले मानक लट्ठे की लंबाई 99 इंच या 8 फीट 3 इंच होती है।
PMGSY की शुरुआत 25 दिसंबर 2000 को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर हुई थी।
एक मानक जरीब (Gunter's Chain) की लंबाई 66 फिट या 22 गज होती है। इसमें 100 कड़ियां होती हैं।
सामुदायिक विकास कार्यक्रम की शुरुआत 2 अक्टूबर 1952 को हुई थी। यह ग्रामीण उत्थान का पहला बड़ा सरकारी प्रयास था।
1957 में बलवंत राय मेहता समिति ने ग्राम, ब्लॉक और जिला स्तर पर त्रि-स्तरीय पंचायत व्यवस्था का सुझाव दिया था।
मनरेगा कानून के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों के अकुशल श्रम रोजगार की गारंटी दी जाती है।
कन्नौज को 'भारत की इत्र राजधानी' कहा जाता है। ग्रामीण विकास में स्थानीय उद्योगों (ODOP) का बड़ा महत्व है।
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