hindi mock test in hindi Practice Set 02
नमस्कार दोस्तों! 👋
अपनी तैयारी को सफलता में बदलने के लिए केवल पढ़ना काफी नहीं है, बल्कि यह जांचना भी जरूरी है कि आप सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं या नहीं। इसी उद्देश्य के लिए हम आपके लिए लेकर आए हैं हिंदी का स्पेशल मिक्स प्रैक्टिस सेट 02।
इस टेस्ट सीरीज की सबसे खास बात यह है कि इसमें हिंदी व्याकरण, काव्य (रस, छंद, अलंकार) और हिंदी साहित्य के सभी महत्वपूर्ण अध्यायों को शामिल किया गया है। हर प्रश्न के नीचे उसकी विस्तृत व्याख्या (Explanation) दी गई है ताकि अगर आपका कोई प्रश्न गलत भी हो, तो आप उसके पीछे के नियम को तुरंत सीख सकें।
💡 याद रखें: परीक्षा में सफलता पाने का एकमात्र मूल मंत्र है — निरंतर अभ्यास!
तो देर किस बात की? अपनी पेन और कॉपी उठाइए, इस मॉक टेस्ट को पूरी ईमानदारी से हल कीजिए और नीचे कमेंट बॉक्स में अपना स्कोर हमारे साथ जरूर शेयर कीजिए। देखते हैं आज आपके 25 में से कितने प्रश्न सही होते हैं!
“दम है तो 25 में से 20+ सही करके दिखाओ!” 🔥
मनोयोग में विसर्ग संधि है। नियम के अनुसार यदि विसर्ग से पहले 'अ' हो और बाद में य, र, ल, व, ह हो, तो विसर्ग का 'ओ' हो जाता है। अतः मनः + योग = मनोयोग।
जिस समास का पहला पद संख्यावाचक विशेषण हो और वह किसी समूह का बोध कराए, वहाँ द्विगु समास होता है। चौराहा का विग्रह 'चार राहों का समाहार' है।
अंशु, मरीचि और रश्मि किरण के पर्यायवाची हैं, जबकि 'प्रकाश' का अर्थ उजाला या आलोक होता है जो किरण से भिन्न है।
'अवनत' का अर्थ झुका हुआ या गिरा हुआ होता है और इसका सही विलोम 'उन्नत' होता है, जिसका अर्थ उठा हुआ या श्रेष्ठ होता है।
'अट्टालिका' एक तत्सम (संस्कृत) शब्द है, जिसका समय के साथ परिवर्तित होकर बना तद्भव रूप 'अटारी' है।
जिसके पास कुछ भी न हो उसे 'अकिंचन' कहा जाता है। 'निर्धन' या 'दरिद्र' केवल धन की कमी को दर्शाते हैं।
वक्त पर किसी काम के लिए साफ़ मना कर देने या देने से इनकार करने को 'अंगूठा दिखाना' कहा जाता है।
इस लोकोक्ति का अर्थ है कि यदि आपने कार्य बुरा (बबूल बोना) किया है, तो आपको उसका परिणाम अच्छा (आम) नहीं मिल सकता।
यहाँ 'त' वर्ण की आवृत्ति बार-बार हुई है। जहाँ एक ही वर्ण की आवृत्ति बार-बार होती है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।
वीभत्स रस का स्थायी भाव जुगुप्सा या घृणा होता है। यह तब जाग्रत होता है जब किसी घृणित वस्तु या दृश्य को देखा जाता है।
दोहा एक मात्रिक अर्द्धसम छंद है क्योंकि इसके पहले और तीसरे चरण में 13-13 मात्राएँ तथा दूसरे और चौथे चरण में 11-11 मात्राएँ होती हैं।
'गोदान' मुंशी प्रेमचंद का सबसे प्रसिद्ध और अंतिम पूर्ण उपन्यास है, जिसे कृषक जीवन का महाकाव्य भी कहा जाता है।
हिंदी व्याकरण में 'कवि' का स्त्रीलिंग रूप 'कवयित्री' होता है, जो कि शुद्ध मानक वर्तनी है।
शुद्ध रूप 'आशीर्वाद' है। रेफ (र की मात्रा) का नियम है कि वह जिस वर्ण से पहले उच्चारित होती है, उसी के ऊपर लगती है (श के बाद और व से पहले)।
जहाँ किसी वस्तु या व्यक्ति का किसी स्थान से अलग होने का भाव प्रकट होता है, वहाँ अपादान कारक (से विभक्ति) होता है।
बुढ़ापा एक अवस्था या भाव को दर्शाता है जिसे छुआ नहीं जा सकता, केवल महसूस किया जा सकता है। अतः यह भाववाचक संज्ञा है।
'यह' शब्द कार की निश्चितता की ओर संकेत कर रहा है। अतः यह निश्चयवाचक (संकेतवाचक) सर्वनाम है।
जहाँ किसी वस्तु की नाप-तौल या मात्रा का बोध होता है, वहाँ परिमाणवाचक विशेषण होता है। लीटर मात्रा को दर्शाता है।
अति + अंत मिलकर यण संधि के नियम से 'अत्यंत' बनता है। अतः यहाँ मूल उपसर्ग 'अति' है।
मूल शब्द 'घबराना' (क्रिया) में 'आहट' प्रत्यय जोड़ने से भाववाचक संज्ञा 'घबराहट' बनती है।
विशेषण 'शुद्ध' का प्रयोग 'दूध' (विशेष्य) के ठीक पहले होना चाहिए न कि 'गाय' के पहले। अतः दूसरा विकल्प पदक्रम की दृष्टि से शुद्ध है।
हिंदी व्याकरण के नियमानुसार पुरुष के लिए 'विद्वान' और महिला के लिए 'विदुषी' शब्द का प्रयोग किया जाता है।
यह अयादि स्वर संधि का उदाहरण है। नियम के अनुसार ओ + अ मिलकर 'अव' हो जाता है। अतः पो + अन = पवन।
जिस समास का पहला पद अव्यय या उपसर्ग हो (यहाँ 'भर' एक अव्यय पद है), उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं।
भारतेंदु हरिश्चंद्र को आधुनिक हिंदी साहित्य और आधुनिक काल के पुनर्जागरण का अग्रदूत या पितामह माना जाता है।
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