Samvidhan top 50 mcq questions in hindi with answers
1. भारत की .प्रस्तावना. (Preamble) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रस्तावना में .न्याय. का विचार फ्रांसीसी क्रांति (1789) से लिया गया है, जबकि .स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व. के
आदर्श रूसी क्रांति से प्रेरित हैं।
2. बेरुबारी संघ मामले (1960) में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि प्रस्तावना संविधान का हिस्सा नहीं है, जबकि केशवानंद
भारती मामले (1973) में इसे संविधान का आंतरिक हिस्सा स्वीकार किया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A. केवल 1
B. केवल 2
C. 1 और 2 दोनों
D. न तो 1 और न ही 2
Correct Answer: B
Detailed Analysis & Explanation:
कथन 1 गलत है क्योंकि प्रस्तावना में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक .न्याय. का आदर्श 1917 की रूसी क्रांति
से लिया गया है, जबकि .स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व. के आदर्श फ्रांसीसी क्रांति (1789) से लिए गए हैं। कथन 2
बिल्कुल सही है; बेरुबारी मामले में इसे संविधान का अंग नहीं माना गया था, जिसे बाद में 1973 के ऐतिहासिक
केशवानंद भारती मामले में बदला गया और कहा गया कि प्रस्तावना संविधान का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और
बुनियादी हिस्सा है।
2. भारतीय संविधान के .मूल ढांचे के सिद्धांत. (Doctrine of Basic Structure) के क्रमिक विकास के संदर्भ में
निम्नलिखित ऐतिहासिक वादों का सही कालानुक्रमिक (Chronological) क्रम क्या है?
1. शंकरी प्रसाद बनाम भारत संघ
2. गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य
3. केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य
4. मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
A. 1 – 2 – 3 – 4
B. 2 – 1 – 3 – 4
C. 1 – 3 – 2 – 4
D. 2 – 3 – 1 – 4
Correct Answer: A
Detailed Analysis & Explanation:
इन ऐतिहासिक वादों का सही कालानुक्रमिक क्रम इस प्रकार है:
1. शंकरी प्रसाद वाद: 1951 (इसमें संसद को प्रथम संशोधन द्वारा मूल अधिकारों सहित संविधान के किसी भी
हिस्से को संशोधित करने की शक्ति को स्वीकार किया गया)।
2. गोलकनाथ वाद: 1967 (न्यायालय ने कहा कि संसद मूल अधिकारों को सीमित या समाप्त नहीं कर सकती)।
3. केशवानंद भारती वाद: 1973 (24वें संशोधन को वैध माना गया लेकिन .मूल ढांचे. का ऐतिहासिक सिद्धांत
प्रतिपादित किया गया)।
4. मिनर्वा मिल्स वाद: 1980 (न्यायालय ने मूल ढांचे को और सुदृढ़ किया तथा कहा कि संसद की संशोधन शक्ति
असीमित नहीं है और न्यायिक समीक्षा मूल ढांचा है)।
3. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत परिभाषित .राज्य. (State) शब्द के दायरे में निम्नलिखित में से कौन-से
निकाय शामिल हैं?
1. भारत की संसद और सरकार
2. भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) और ओएनजीसी (ONGC)
3. स्थानीय निकाय जैसे नगरपालिकाएं और जिला बोर्ड
4. कोई भी निजी संस्था जो राज्य के प्रतिनिधि या एजेंसी के रूप में कार्य कर रही हो
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
A. केवल 1, 2 और 3
B. केवल 1 और 3
C. केवल 2, 3 और 4
D. 1, 2, 3 और 4
Correct Answer: D
Detailed Analysis & Explanation:
भाग-3 (मौलिक अधिकार) के संदर्भ में अनुच्छेद 12 .राज्य. शब्द को व्यापक रूप से परिभाषित करता है। इसमें
शामिल हैं: (क) केंद्र सरकार और संसद, (ख) राज्य सरकारें और विधानमंडल, (ग) सभी स्थानीय प्राधिकारी (जैसे
नगरपालिका, पंचायतें, जिला बोर्ड), (घ) अन्य सभी वैधानिक या गैर-वैधानिक प्राधिकरण (जैसे LIC, ONGC,
SAIL, GAIL)। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के अनुसार, कोई भी निजी इकाई या एजेंसी जो राज्य की संस्था या
प्रतिनिधि के रूप में कार्य कर रही है, वह भी अनुच्छेद 12 के तहत .राज्य. की परिभाषा के अंतर्गत आती है।
4. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्राप्त .प्राण और दैहिक स्वतंत्रता के अधिकार. (Right to Life and
Personal Liberty) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ए.के. गोपालन मामले (1950) में सर्वोच्च न्यायालय ने .विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया. (Procedure established
by law) की संकीर्ण व्याख्या की।
2. मेनका गांधी मामले (1978) में न्यायालय ने अमेरिकी संविधान की .विधि की उचित प्रक्रिया. (Due process of
law) के सिद्धांत को अपनाया और इसके तहत .ऋजु, न्यायसंगत और उचित. प्रक्रिया की मांग की।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A. केवल 1
B. केवल 2
C. 1 और 2 दोनों
D. न तो 1 और न ही 2
Correct Answer: C
Detailed Analysis & Explanation:
दोनों कथन सही हैं। 1950 के ए.के. गोपालन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 21 की संकीर्ण व्याख्या करते हुए
कहा कि .विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया. का मतलब केवल यह है कि कानून कार्यपालिका की मनमानी के खिलाफ
सुरक्षा देता है, न कि विधायिका के मनमाने कानून के खिलाफ। लेकिन 1978 के मेनका गांधी मामले में कोर्ट ने इस
व्याख्या को उलट दिया और अमेरिकी अवधारणा .विधि की उचित प्रक्रिया. (Due Process of Law) को
समाहित किया। कोर्ट ने कहा कि कानून न केवल स्थापित प्रक्रिया से बना होना चाहिए, बल्कि वह प्रक्रिया स्वयं भी
.उचित, ऋजु और तार्किक. (Fair, Just and Reasonable) होनी चाहिए।
5. निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा एक, भारत के नागरिक के .धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार. (Right to Freedom
of Religion – अनुच्छेद 25-28) की संवैधानिक सीमाओं को सही ढंग से दर्शाता है?
A. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार आत्यंतिक (Absolute) है और इस पर राज्य कोई प्रतिबंध नहीं लगा सकता।
B. इस अधिकार पर केवल .सार्वजनिक व्यवस्था. (Public Order) के आधार पर ही प्रतिबंध लगाया जा सकता
है।
C. यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था (Public Order), नैतिकता (Morality) और स्वास्थ्य (Health) तथा
भाग-3 के अन्य उपबंधों के अधीन प्रतिबंधित किया जा सकता है।
D. विदेशी नागरिकों को अनुच्छेद 25 के तहत अंतःकरण की स्वतंत्रता प्राप्त नहीं है।
Correct Answer: C
Detailed Analysis & Explanation:
अनुच्छेद 25(1) स्पष्ट रूप से उल्लेख करता है कि अंतःकरण की स्वतंत्रता और धर्म के अबाध रूप से मानने, आचरण
करने और प्रचार करने का अधिकार लोक व्यवस्था (Public Order), सदाचार/नैतिकता (Morality) और
स्वास्थ्य (Health) तथा मौलिक अधिकारों के इस भाग (भाग-3) के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए प्राप्त होगा।
अतः यह अधिकार असीमित (Absolute) नहीं है। यह अधिकार नागरिकों और विदेशियों दोनों को समान रूप से
उपलब्ध है।
6. राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) और मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) के मध्य सर्वोच्चता के
विवाद के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन न्यायिक निर्णयों के अनुसार सही स्थिति को दर्शाता है?
A. चंपकम दोरैराजन मामले (1951) में न्यायालय ने नीति निर्देशक तत्वों को मूल अधिकारों पर सर्वोच्च माना।
B. 25वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़े गए अनुच्छेद 31-ग (31C) को मिनर्वा मिल्स मामले (1980) में पूरी तरह
असंवैधानिक घोषित कर दिया गया।
C. वर्तमान स्थिति के अनुसार, मूल अधिकार और नीति निर्देशक तत्व एक-दूसरे के पूरक हैं और इनके बीच
.सद्भावपूर्ण संतुलन. (Harmonious Construction) संविधान का मूल ढांचा है।
D. संसद किसी भी स्थिति में नीति निर्देशक तत्वों को लागू करने के लिए मूल अधिकारों में संशोधन नहीं कर
सकती।
Correct Answer: C
Detailed Analysis & Explanation:
मिनर्वा मिल्स मामले (1980) में सर्वोच्च न्यायालय ने यह व्यवस्था दी कि भारतीय संविधान मूल अधिकारों और
नीति निर्देशक तत्वों के बीच .सद्भावपूर्ण संतुलन. (Harmonious Construction) की आधारशिला पर टिका है।
ये एक-दूसरे के पूरक हैं। चंपकम दोरैराजन मामले (1951) में कोर्ट ने मूल अधिकारों को सर्वोच्च माना था न कि
DPSP को। 25वें संशोधन के अनुच्छेद 31C के उस हिस्से को वैध माना गया जो अनुच्छेद 39(b) और 39(c)
को लागू करने के लिए अनुच्छेद 14 और 19 पर प्राथमिकता देता है, लेकिन मिनर्वा मिल्स में इसके असीमित
विस्तार को खारिज किया गया था।
7. भारत के .मूल कर्तव्यों. (Fundamental Duties) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल संविधान में मूल कर्तव्यों की कोई सूची नहीं थी, इन्हें स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर 42वें संविधान
संशोधन, 1976 द्वारा जोड़ा गया।
2. जे.एस. वर्मा समिति (1999) ने कुछ मूल कर्तव्यों की कानूनी पहचान और उनके क्रियान्वयन के लिए कानूनी
प्रावधानों की पहचान की थी।
3. मूल कर्तव्य प्रकृति में गैर-न्यायोचित (Non-justiciable) हैं, लेकिन संसद इनके उल्लंघन पर उचित कानूनी दंड का
प्रावधान कर सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
A. केवल 1 और 2
B. केवल 2 और 3
C. केवल 1 और 3
D. 1, 2 और 3
Correct Answer: D
Detailed Analysis & Explanation:
तीनों कथन सही हैं। मूल संविधान में मूल कर्तव्य नहीं थे, इन्हें स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर 42वें संशोधन
द्वारा भाग IV-क और अनुच्छेद 51-क के तहत जोड़ा गया (शुरुआत में 10 थे, 86वें संशोधन 2002 द्वारा 11वां
जोड़ा गया)। जे.एस. वर्मा समिति (1999) ने मूल कर्तव्यों के क्रियान्वयन के संबंध में कानूनी तंत्रों की समीक्षा की थी
(जैसे पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम आदि)। ये अधिकार गैर-न्यायोचित हैं (अर्थात
इनके उल्लंघन पर सीधे रिट जारी नहीं हो सकती), लेकिन संसद कानून बनाकर इनके उल्लंघन पर दंड तय कर
सकती है।
8. .संसदीय संप्रभुता. (Parliamentary Sovereignty) और .न्यायिक सर्वोच्चता. (Judicial Supremacy) के
सिद्धांतों के समन्वय के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारतीय संसदीय प्रणाली ब्रिटिश मॉडल की तरह पूर्ण संप्रभु नहीं है, क्योंकि भारत में लिखित संविधान और न्यायिक
समीक्षा (Judicial Review) की व्यवस्था है।
2. भारतीय न्यायपालिका की न्यायिक समीक्षा की शक्ति अमेरिकी न्यायपालिका की तुलना में अधिक व्यापक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A. केवल 1
B. केवल 2
C. 1 और 2 दोनों
D. न तो 1 और न ही 2
Correct Answer: A
Detailed Analysis & Explanation:
कथन 1 सही है क्योंकि ब्रिटिश संसद पूरी तरह संप्रभु है (वहां कोई लिखित संविधान नहीं है और न्यायालय संसद के
कानून को रद्द नहीं कर सकता), जबकि भारतीय संसद पर लिखित संविधान, संघीय ढांचा और मूल अधिकार जैसी
सीमाएं लागू हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि अमेरिकी न्यायपालिका की न्यायिक समीक्षा की शक्ति भारतीय
न्यायपालिका से अधिक व्यापक है। अमेरिका में न्यायपालिका .विधि की उचित प्रक्रिया. (Due Process of
Law) का पालन करती है, जबकि भारतीय संविधान में मूलतः .विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया. (Procedure
Established by Law) का उल्लेख है, यद्यपि मेनका गांधी केस के बाद भारत में भी इसका दायरा काफी बढ़
गया है, फिर भी अमेरिकी कोर्ट अधिक शक्तिशाली माना जाता है।
9. भारत के राष्ट्रपति की .क्षमादान शक्ति. (Pardoning Power – अनुच्छेद 72) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से
कौन-सा सही नहीं है?
A. राष्ट्रपति सैन्य न्यायालय (Court Martial) द्वारा दी गई सजा को पूरी तरह क्षमा कर सकता है, जबकि
राज्यपाल को यह शक्ति प्राप्त नहीं है।
B. राष्ट्रपति मृत्युदंड को पूरी तरह क्षमा कर सकता है, जबकि अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल मृत्युदंड को
निलंबित, परिहार या लघुकरण तो कर सकता है, लेकिन पूर्ण क्षमा नहीं कर सकता।
C. क्षमादान की याचिका पर निर्णय लेते समय राष्ट्रपति को याचिकाकर्ता को मौखिक सुनवाई (Oral Hearing)
का अधिकार देना अनिवार्य है।
D. राष्ट्रपति की इस शक्ति का प्रयोग केंद्रीय मंत्रिपरिषद की सलाह पर ही किया जाता है और यह निर्णय न्यायिक
समीक्षा (Judicial Review) के अधीन है यदि यह मनमाना या दुर्भावनापूर्ण हो।
Correct Answer: C
Detailed Analysis & Explanation:
कथन C गलत है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने .केहर सिंह बनाम भारत संघ. और .मारू राम वाद. में स्पष्ट किया है
कि राष्ट्रपति के समक्ष क्षमादान की गुहार लगाने वाले याचिकाकर्ता को .मौखिक सुनवाई. (Oral Hearing) का
कोई अधिकार नहीं है। राष्ट्रपति केवल लिखित दस्तावेजों के आधार पर ही विचार करता है। बाकी सभी कथन (A,
B और D) पूरी तरह सही और तथ्यात्मक हैं।
10. भारत के उपराष्ट्रपति को पद से हटाने की प्रक्रिया (Removal Procedure) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर
विचार कीजिए:
1. उपराष्ट्रपति को हटाने का प्रस्ताव केवल .राज्यसभा. में ही पुरःस्थापित (Introduce) किया जा सकता है।
2. इसे राज्यसभा के .तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत. (Effective Majority) द्वारा पारित होना चाहिए और
लोकसभा की केवल सामान्य सहमति (Simple Majority) आवश्यक है।
3. संविधान में उपराष्ट्रपति को हटाने के लिए किसी विशिष्ट आधार या कारण का उल्लेख नहीं किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
A. केवल 1 और 2
B. केवल 2 और 3
C. केवल 1 और 3
D. 1, 2 और 3
Correct Answer: D
Detailed Analysis & Explanation:
तीनों कथन बिल्कुल सही हैं। अनुच्छेद 67(ख) के अनुसार, उपराष्ट्रपति को राज्यसभा के ऐसे प्रस्ताव द्वारा पद से
हटाया जा सकता है जिसे राज्यसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत (Effective Majority) ने पारित
किया हो और जिससे लोकसभा सहमत (Simple Majority से) हो। ऐसा प्रस्ताव केवल राज्यसभा में ही शुरू हो
सकता है और इसके लिए 14 दिन का पूर्व नोटिस देना अनिवार्य है। संविधान में उपराष्ट्रपति को हटाने के लिए किसी
विशेष आधार (जैसे राष्ट्रपति के लिए .संविधान का अतिक्रमण.) का कोई उल्लेख नहीं है।
11. भारतीय संविधान के अंतर्गत .मंत्रिपरिषद के सामूहिक उत्तरदायित्व. (Collective Responsibility) के सिद्धांत
का वास्तविक निहितार्थ क्या है?
1. यदि लोकसभा में सरकार के विरुद्ध .अविश्वास प्रस्ताव. पारित हो जाता है, तो केवल प्रधानमंत्री को इस्तीफा देना
होता है, अन्य मंत्रियों को नहीं।
2. कैबिनेट के फैसले सभी मंत्रियों पर बाध्यकारी होते हैं, भले ही वे कैबिनेट की बैठक में असहमत रहे हों; संसद के भीतर
या बाहर उन्हें कैबिनेट के फैसले का समर्थन करना ही होगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A. केवल 1
B. केवल 2
C. 1 और 2 दोनों
D. न तो 1 और न ही 2
Correct Answer: B
Detailed Analysis & Explanation:
कथन 1 गलत है क्योंकि सामूहिक उत्तरदायित्व (अनुच्छेद 75-3) के तहत यदि लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव
पारित होता है, तो पूरी मंत्रिपरिषद (लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों के मंत्रियों सहित) को त्यागपत्र देना
पड़ता है। इसे .साथ तैरना और साथ डूबना. कहा जाता है। कथन 2 बिल्कुल सही है, सामूहिक उत्तरदायित्व का यह
भी अर्थ है कि कैबिनेट का फैसला सामूहिक होता है। यदि कोई मंत्री कैबिनेट के फैसले से असहमत है, तो उसे पद से
इस्तीफा देना होगा (जैसे डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने हिंदू कोड बिल पर असहमति के कारण इस्तीफा दिया था)।
12. .धन विधेयक. (Money Bill) और .वित्त विधेयक (श्रेणी-I). [Financial Bill-I] के बीच अंतर के संदर्भ में
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. धन विधेयक में केवल अनुच्छेद 110 में उल्लिखित विषय शामिल होते हैं, जबकि वित्त विधेयक (I) में अनुच्छेद 110
के विषयों के साथ-साथ सामान्य विधायी विषय भी शामिल होते हैं।
2. धन विधेयक के मामले में संयुक्त बैठक (Joint Sitting) का कोई प्रावधान नहीं है, जबकि वित्त विधेयक (I) पर
असहमति होने पर राष्ट्रपति दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुला सकता है।
3. दोनों विधेयकों को केवल राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश पर ही लोकसभा में पेश किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
A. केवल 1 और 2
B. केवल 2 और 3
C. केवल 1 और 3
D. 1, 2 और 3
Correct Answer: D
Detailed Analysis & Explanation:
तीनों कथन पूरी तरह सही हैं। धन विधेयक (अनुच्छेद 110) अत्यंत विशिष्ट होता है। वित्त विधेयक (श्रेणी-I)
अनुच्छेद 117(1) के तहत आता है, इसमें कर या व्यय के अलावा अन्य सामान्य कानून भी शामिल होते हैं। धन
विधेयक को राज्यसभा अधिकतम 14 दिन रोक सकती है, इसलिए इस पर संयुक्त बैठक नहीं होती। लेकिन वित्त
विधेयक (I) को राज्यसभा साधारण विधेयक की तरह खारिज या संशोधित कर सकती है, इसलिए गतिरोध होने
पर अनुच्छेद 108 के तहत संयुक्त बैठक बुलाई जा सकती है। समानता यह है कि दोनों ही विधेयक केवल लोकसभा
में पेश हो सकते हैं और दोनों के लिए राष्ट्रपति की पूर्व सहमति अनिवार्य है।
13. भारतीय संसद की .संसदीय विशेषाधिकार. (Parliamentary Privileges – अनुच्छेद 105) की शक्ति के संदर्भ
में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संसद के किसी भी सदस्य को दीवानी (Civil) और आपराधिक (Criminal) दोनों मामलों में सत्र के दौरान और सत्र
शुरू होने से 40 दिन पहले तथा 40 दिन बाद तक गिरफ्तारी से छूट प्राप्त है।
2. किसी सदस्य द्वारा सदन के भीतर कही गई किसी भी बात या दिए गए मत के विरुद्ध देश के किसी भी न्यायालय में
कोई कानूनी कार्यवाही नहीं की जा सकती।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A. केवल 1
B. केवल 2
C. 1 और 2 दोनों
D. न तो 1 और न ही 2
Correct Answer: B
Detailed Analysis & Explanation:
कथन 1 गलत है क्योंकि सत्र के दौरान 40 दिन आगे-पीछे गिरफ्तारी से छूट केवल .दीवानी मामलों. (Civil
Cases) में प्राप्त है, .अपराधिक मामलों. (Criminal Cases) या निवारक निरोध (Preventive
Detention) के मामलों में संसद सदस्यों को गिरफ्तारी से कोई छूट प्राप्त नहीं है। कथन 2 बिल्कुल सही है,
अनुच्छेद 105(2) के तहत सांसदों को सदन के भीतर वाक्-स्वतंत्रता का पूर्ण अधिकार है और उनके द्वारा सदन में
दिए गए किसी भी बयान या वोट को किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती (यह विशेषाधिकार आत्यंतिक
है)।
14. सर्वोच्च न्यायालय के .मूल क्षेत्राधिकार. (Original Jurisdiction – अनुच्छेद 131) के अंतर्गत निम्नलिखित में से
कौन-से विवाद शामिल हैं?
1. भारत सरकार और एक या अधिक राज्यों के बीच का विवाद
2. दो या अधिक राज्यों के बीच का विवाद
3. किसी अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद का मामला
4. वित्त आयोग को संदर्भित किए जाने वाले मामले
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
A. केवल 1 और 2
B. केवल 1, 2 और 3
C. केवल 1, 2 और 4
D. 1, 2, 3 और 4
Correct Answer: A
Detailed Analysis & Explanation:
अनुच्छेद 131 के तहत सर्वोच्च न्यायालय का मूल क्षेत्राधिकार संघीय विवादों तक सीमित है (केंद्र बनाम राज्य, या
राज्य बनाम राज्य)। हालांकि, इसके कुछ अपवाद हैं जहाँ यह मूल क्षेत्राधिकार लागू नहीं होता: (क) संविधान-पूर्व
की संधियां या समझौते, (ख) अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद (अनुच्छेद 262 के तहत इसके लिए अलग ट्रिब्यूनल
बनता है), (ग) वित्त आयोग से जुड़े मामले, (घ) केंद्र और राज्यों के बीच खर्चों का सामान्य समायोजन। अतः केवल 1
और 2 ही मूल क्षेत्राधिकार में शामिल हैं।
15. भारतीय न्यायपालिका में .न्यायाधीशों की नियुक्ति की कॉलेजियम प्रणाली. (Collegium System) के क्रमिक
विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. .प्रथम न्यायाधीश वाद. (1982) में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि .परामर्श. (Consultation) का अर्थ .सहमति.
(Concurrence) नहीं है और कार्यपालिका को सर्वोच्चता प्राप्त है।
2. .द्वितीय न्यायाधीश वाद. (1993) में न्यायालय ने अपने निर्णय को उलट दिया और कॉलेजियम प्रणाली की स्थापना
की, जिसमें CJI और दो वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल थे।
3. .तृतीय न्यायाधीश वाद. (1998) में राष्ट्रपति द्वारा मांगे गए परामर्श (अनुच्छेद 143) के तहत कॉलेजियम का विस्तार
करके इसे CJI और 4 वरिष्ठतम न्यायाधीशों का निकाय बना दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
A. केवल 1 और 2
B. केवल 2 और 3
C. केवल 1 और 3
D. 1, 2 और 3
Correct Answer: D
Detailed Analysis & Explanation:
तीनों कथन कॉलेजियम प्रणाली के इतिहास को सही ढंग से दर्शाते हैं। 1982 के फर्स्ट जजेस केस में परामर्श का अर्थ
केवल विचारों का आदान-प्रदान माना गया। 1993 के सेकेंड जजेस केस में कोर्ट ने कहा कि परामर्श का अर्थ
.सहमति. है और यहीं से 3-सदस्यीय कॉलेजियम बना। 1998 के थर्ड जजेस केस (जो एक प्रेसिडेंशियल रेफरेंस था) में
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कॉलेजियम में केवल मुख्य न्यायाधीश की व्यक्तिगत राय पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह
CJI और 4 अन्य वरिष्ठतम न्यायाधीशों (कुल 5 सदस्यीय निकाय) की सामूहिक राय होनी चाहिए।
16. भारतीय संविधान की .अनुसूचियों. के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. पांचवीं अनुसूची : असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों के जनजातीय क्षेत्रों का प्रशासन।
2. नौवीं अनुसूची : कुछ अधिनियमों और विनियमों का विधिमान्यकरण (जिन्हें न्यायिक समीक्षा से संरक्षण प्राप्त था)।
3. ग्यारहवीं अनुसूची : नगरपालिकाओं की शक्तियां, प्राधिकार और उत्तरदायित्व।
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
A. केवल 1 और 2
B. केवल 2
C. केवल 2 और 3
D. 1, 2 और 3
Correct Answer: B
Detailed Analysis & Explanation:
केवल युग्म 2 सही सुमेलित है। युग्म 1 गलत है क्योंकि असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम (AMTM) के
जनजातीय क्षेत्रों का प्रशासन .छठी अनुसूची. में है, जबकि .पांचवीं अनुसूची. में इन चार राज्यों को छोड़कर अन्य
राज्यों के अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन का उल्लेख है। युग्म 3 भी गलत है क्योंकि
.ग्यारहवीं अनुसूची. पंचायतों से संबंधित है (73वां संशोधन), जबकि नगरपालिकाओं का उल्लेख .बारहवीं अनुसूची.
(74वां संशोधन) में है। नौवीं अनुसूची प्रथम संशोधन (1951) द्वारा जोड़ी गई थी, जो भूमि सुधारों की रक्षा के लिए
थी।
17. .केंद्र-राज्य विधायी संबंधों. (Central-State Legislative Relations) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से
कौन-सा सही है?
A. राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) के दौरान संसद द्वारा राज्य सूची के विषय पर बनाया गया कानून
आपातकाल समाप्त होने के बाद भी स्थायी रूप से प्रभावी रहता है।
B. यदि दो या अधिक राज्यों के विधानमंडल संसद से राज्य सूची के किसी विषय पर कानून बनाने का अनुरोध
करते हैं (अनुच्छेद 252), तो वह कानून केवल उन्हीं राज्यों पर लागू होता है और संसद के अलावा कोई अन्य राज्य इसे
बाद में नहीं अपना सकता।
C. अनुच्छेद 253 के तहत संसद को अंतर्राष्ट्रीय संधियों और समझौतों को लागू करने के लिए राज्य सूची के किसी
भी विषय पर संपूर्ण भारत के लिए कानून बनाने की पूर्ण शक्ति प्राप्त है।
D. राज्य सूची के विषयों पर कानून बनाने की संसद की शक्ति आत्यंतिक है और इसके लिए राज्यों की सहमति
सदैव आवश्यक होती है।
Correct Answer: C
Detailed Analysis & Explanation:
कथन C बिल्कुल सही है। अनुच्छेद 253 संसद को यह विशेष शक्ति देता है कि किसी अंतर्राष्ट्रीय संधि, समझौते या
कंवेंशन को लागू करने के लिए वह राज्य सूची के किसी भी विषय पर कानून बना सकती है और इसके लिए उसे
राज्यों की सहमति की आवश्यकता नहीं होती (जैसे पर्यावरण से जुड़े राष्ट्रीय कानून इसी के तहत बनते हैं)। कथन A
गलत है क्योंकि आपातकाल के दौरान संसद द्वारा राज्य सूची पर बनाया गया कानून आपातकाल हटने के 6 महीने
बाद स्वतः समाप्त हो जाता है। कथन B गलत है क्योंकि अनुच्छेद 252 के तहत बना कानून अन्य राज्य भी अपने
विधानमंडल में प्रस्ताव पारित करके बाद में अपना सकते हैं।
18. भारतीय संविधान के अंतर्गत .संवैधानिक निकायों. (Constitutional Bodies) और उनके अनुच्छेदों के संदर्भ में
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. भारत का महान्यायवादी (Attorney General) : अनुच्छेद 76
2. राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) : अनुच्छेद 338-क
3. विशेष भाषाई अल्पसंख्यक अधिकारी (Special Officer for Linguistic Minorities) : अनुच्छेद 350-ख
4. भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) : अनुच्छेद 148
उपर्युक्त युग्मों में से कितने सही सुमेलित हैं?
A. केवल एक युग्म
B. केवल दो युग्म
C. केवल तीन युग्म
D. सभी चारों युग्म
Correct Answer: D
Detailed Analysis & Explanation:
सभी चारों युग्म बिल्कुल सही सुमेलित हैं:
1. महान्यायवादी का पद अनुच्छेद 76 में वर्णित है।
2. राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) 89वें संशोधन द्वारा अनुच्छेद 338-क (338A) के तहत स्थापित
किया गया।
3. विशेष भाषाई अल्पसंख्यक अधिकारी का पद 7वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1956 द्वारा अनुच्छेद 350-ख
(350B) के तहत जोड़ा गया था।
4. CAG का पद अनुच्छेद 148 के तहत एक स्वतंत्र संवैधानिक पद है।
19. भारत के .निर्वाचन आयोग. (Election Commission of India – अनुच्छेद 324) के संबंध में निम्नलिखित
कथनों पर विचार कीजिए:
1. मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों (ECs) की शक्तियां और वेतन-भत्ते समान होते हैं।
2. यदि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच किसी मामले पर वैचारिक मतभेद होता है, तो मामले का
निर्णय .बहुमत. (Majority) के आधार पर किया जाता है।
3. अन्य चुनाव आयुक्तों को मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश के बिना उनके पद से नहीं हटाया जा सकता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
A. केवल 1 और 2
B. केवल 2 और 3
C. केवल 1 और 3
D. 1, 2 और 3
Correct Answer: D
Detailed Analysis & Explanation:
तीनों कथन सही हैं। यद्यपि मुख्य चुनाव आयुक्त आयोग का अध्यक्ष होता है, लेकिन उसकी शक्तियां अन्य चुनाव
आयुक्तों के बराबर ही होती हैं। उनका वेतन और भत्ते सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के समान होते हैं (कथन 1 सही)।
यदि किसी विषय पर मतभेद हो, तो आयोग बहुमत से निर्णय लेता है; यहाँ CEC को कोई वीटो शक्ति प्राप्त नहीं है
(कथन 2 सही)। सुरक्षा के मामले में, CEC को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के जज जैसी कठिन प्रक्रिया (महाभियोग
जैसी) अपनानी पड़ती है, जबकि अन्य चुनाव आयुक्तों को हटाने के लिए राष्ट्रपति को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC)
की सिफारिश मिलना अनिवार्य है (कथन 3 सही)।
20. भारतीय संविधान के .अनुच्छेद 356. (राष्ट्रपति शासन/State Emergency) के प्रयोग के संबंध में .एस.आर.
बोम्मई बनाम भारत संघ. (1994) मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों के संदर्भ में निम्नलिखित
कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति शासन लागू करने की घोषणा न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे से बाहर है।
2. राज्य विधानसभा को राष्ट्रपति शासन लागू होते ही तुरंत भंग नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि संसद की मंजूरी मिलने
तक उसे केवल निलंबित (Suspend) रखा जाना चाहिए।
3. यदि संसद के दोनों सदन दो महीने के भीतर राष्ट्रपति शासन की घोषणा को मंजूरी नहीं देते हैं, तो भंग की गई या
निलंबित विधानसभा स्वतः पुनर्जीवित हो जाएगी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
A. केवल 1 export और 2
B. केवल 2 और 3
C. केवल 1 और 3
D. 1, 2 और 3
Correct Answer: B
Detailed Analysis & Explanation:
कथन 1 गलत है क्योंकि एस.आर. बोम्मई मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा था कि अनुच्छेद 356 के तहत
राष्ट्रपति की संतुष्टि या घोषणा न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के अधीन है और यदि वह दुर्भावनापूर्ण पाई
जाती है तो कोर्ट उसे रद्द कर सकता है। कथन 2 और 3 बिल्कुल सही हैं; कोर्ट ने मनमाने प्रयोग को रोकने के लिए
कहा कि राष्ट्रपति घोषणा के तुरंत बाद विधानसभा भंग नहीं कर सकते, वे केवल उसे निलंबित रख सकते हैं। जब
संसद के दोनों सदन 2 महीने में इसे पास कर देंगे, तभी विधानसभा भंग हो सकती है। यदि संसद इसे पास नहीं
करती, तो पुरानी सरकार और विधानसभा स्वतः बहाल/पुनर्जीवित हो जाएगी।
21. भारत के .राष्ट्रीय आपातकाल. (National Emergency – अनुच्छेद 352) के संदर्भ में, 44वें संविधान संशोधन
अधिनियम, 1978 द्वारा किए गए सुरक्षात्मक बदलावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आपातकाल की घोषणा के आधार के रूप में .आंतरिक अशांति. (Internal Disturbance) शब्द को हटाकर .सशस्त्र
विद्रोह. (Armed Rebellion) शब्द शामिल किया गया।
2. राष्ट्रपति केवल तभी राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर सकता है जब उसे केंद्रीय कैबिनेट (प्रधानमंत्री और कैबिनेट
मंत्रियों का निकाय) द्वारा .लिखित रूप में. ऐसी सिफारिश मिले।
3. संसद के दोनों सदनों द्वारा आपातकाल की उद्घोषणा को जारी रखने का अनुमोदन विशेष बहुमत (Special
Majority) से होना अनिवार्य किया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
A. केवल 1 और 2
B. केवल 2 और 3
C. केवल 1 और 3
D. 1, 2 और 3
Correct Answer: D
Detailed Analysis & Explanation:
तीनों कथन बिल्कुल सही हैं। 1975 के आपातकाल के दुरुपयोग को रोकने के लिए 44वें संशोधन (1978) द्वारा कई
कड़े प्रावधान किए गए: (1) .आंतरिक अशांति. के स्थान पर .सशस्त्र विद्रोह. शब्द जोड़ा गया। (2) केवल प्रधानमंत्री
की मौखिक सलाह पर नहीं, बल्कि पूरी कैबिनेट की लिखित सलाह (Written Recommendation) अनिवार्य
की गई। (3) पहले अनुमोदन साधारण बहुमत से होता था, जिसे बदलकर दोनों सदनों में .विशेष बहुमत. (कुल
सदस्यता का बहुमत और उपस्थित व मतदान करने वालों का 2/3) अनिवार्य किया गया, और अनुमोदन की
समयावधि 2 महीने से घटाकर 1 महीना कर दी गई।
22. भारतीय संविधान के .अनुच्छेद 368. के तहत संविधान संशोधन विधेयक (Constitution Amendment Bill)
पारित करने की प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऐसा विधेयक संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है और इसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व स्वीकृति आवश्यक
नहीं है।
2. यदि दोनों सदनों के बीच इस विधेयक पर गतिरोध (Deadlock) उत्पन्न हो जाए, तो राष्ट्रपति दोनों सदनों की संयुक्त
बैठक (Joint Sitting) बुला सकता है।
3. राष्ट्रपति ऐसे संशोधन विधेयक पर न तो अपनी सहमति रोक सकता है और न ही इसे पुनर्विचार के लिए संसद को
वापस भेज सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
A. केवल 1 और 2
B. केवल 2 और 3
C. केवल 1 and 3
D. 1, 2 और 3
Correct Answer: C
Detailed Analysis & Explanation:
कथन 1 और 3 सही हैं, जबकि कथन 2 गलत है। संविधान संशोधन विधेयक के मामले में .संयुक्त बैठक. (Joint
Sitting) का कोई प्रावधान नहीं है; इसे दोनों सदनों द्वारा अलग-अलग अपने विशेष बहुमत से पारित करना
अनिवार्य होता है (अतः कथन 2 गलत है)। कथन 1 सही है कि इसे किसी भी सदन में मंत्री या गैर-सरकारी सदस्य
द्वारा बिना राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति के पेश किया जा सकता है। कथन 3 भी सही है; 24वें संविधान संशोधन
अधिनियम, 1971 द्वारा राष्ट्रपति के लिए संविधान संशोधन विधेयक पर अपनी सहमति देना .अनिवार्य. (Bound)
बना दिया गया है।
23. भारत के .महान्यायवादी. (Attorney General) और .सॉलिसिटर जनरल. (Solicitor General) के पदों के
संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत का महान्यायवादी संविधान के अनुच्छेद 76 के तहत एक संवैधानिक पद है, जबकि सॉलिसिटर जनरल का पद
पूर्णतः वैधानिक/गैर-संवैधानिक है जो महान्यायवादी की सहायता के लिए होता है।
2. महान्यायवादी को भारत के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है, और वह संसद के दोनों सदनों की
कार्यवाहियों तथा संयुक्त बैठक में भाग ले सकता है और मतदान भी कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A. केवल 1
B. केवल 2
C. 1 और 2 दोनों
D. न तो 1 और न ही 2
Correct Answer: A
Detailed Analysis & Explanation:
कथन 1 बिल्कुल सही है; महान्यायवादी एक संवैधानिक पद (अनुच्छेद 76) है, जबकि सॉलिसिटर जनरल और
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के पद संवैधानिक नहीं हैं, वे केवल महान्यायवादी को उसके अत्यधिक कानूनी कार्यों
में सहायता देने के लिए वैधानिक नियमों के तहत बनाए गए हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि यद्यपि महान्यायवादी
संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही में बोल सकता है, भाग ले सकता है और समितियों का सदस्य बन सकता है
(अनुच्छेद 88), लेकिन उसे संसद में .मतदान करने का अधिकार. (Right to Vote) प्राप्त नहीं है क्योंकि वह संसद
का सदस्य नहीं होता है।
24. पंचायती राज संस्थाओं के संबंध में .73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992. के अंतर्गत निम्नलिखित में से कौन-से
प्रावधान राज्यों के लिए .अनिवार्य. (Compulsory/Mandatory) श्रेणी में आते हैं?
1. ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर पर त्रि-स्तरीय पंचायती राज ढांचे का गठन करना।
2. सभी स्तरों पर पंचायतों के चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित करना।
3. पिछड़ें वर्गों (OBCs) के लिए पंचायतों में उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटों का आरक्षण करना।
4. पंचायतों को कर (Taxes) लगाने, एकत्र करने और वित्तीय रूप से स्वायत्त बनाने की शक्तियां सौंपना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
A. केवल 1 और 2
B. केवल 1, 2 और 4
C. केवल 2, 3 और 4
D. 1, 2, 3 और 4
Correct Answer: A
Detailed Analysis & Explanation:
73वें संशोधन में प्रावधानों को दो श्रेणियों में बांटा गया है: अनिवार्य (Compulsory) और स्वैच्छिक
(Voluntary)।
– अनिवार्य प्रावधान: त्रि-स्तरीय ढांचा (कथन 1), चुनाव के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष होना (कथन 2), महिलाओं
के लिए 1/3 सीटों का आरक्षण, SC/ST के लिए जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण, राज्य वित्त व राज्य चुनाव
आयोग का गठन।
– स्वैच्छिक प्रावधान (जो राज्यों की इच्छा पर निर्भर हैं): पिछड़े वर्गों (OBCs) को आरक्षण देना (कथन 3
स्वैच्छिक है), पंचायतों को कर लगाने की वित्तीय शक्तियां सौंपना या बजट देना (कथन 4 स्वैच्छिक है), सांसदों व
विधायकों को पंचायतों में सदस्यता देना। अतः केवल 1 और 2 ही अनिवार्य हैं।
25. भारत की संघीय व्यवस्था (Federal System) के अंतर्गत निम्नलिखित में से कौन-सी विशेषताएं इसकी
.एकात्मक प्रवृत्ति. (Unitary Features) को दर्शाती हैं, जो केंद्र को राज्यों की तुलना में अधिक शक्तिशाली बनाती हैं?
1. एकल नागरिकता (Single Citizenship)
2. एकीकृत न्यायपालिका (Integrated Judiciary)
3. आपातकालीन उपबंध (Emergency Provisions)
4. राज्यपाल की राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति
5. अखिल भारतीय सेवाएं (All India Services)
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
A. केवल 1, 3 और 5
B. केवल 2, 4 और 5
C. केवल 1, 3, 4 और 5
D. 1, 2, 3, 4 and 5
Correct Answer: D
Detailed Analysis & Explanation:
ये सभी पांचों विशेषताएं भारतीय संविधान की .एकात्मक या गैर-संघीय. (Unitary/Non-Federal Features)
प्रवृत्तियां हैं। एक सामान्य संघीय ढांचे (जैसे अमेरिका) में दोहरी नागरिकता, स्वतंत्र व पृथक राज्य न्यायपालिका
होती है तथा राज्यों के गवर्नर सीधे जनता द्वारा चुने जा सकते हैं। लेकिन भारत में एकल नागरिकता (कथन 1),
शीर्ष पर सुप्रीम कोर्ट के साथ एकीकृत न्यायपालिका (कथन 2), आपातकाल में केंद्र का पूर्ण नियंत्रण (कथन 3), केंद्र
के प्रतिनिधि के रूप में राज्यपाल की नियुक्ति (कथन 4) और केंद्र द्वारा नियंत्रित अखिल भारतीय सेवाएं जो राज्यों
में तैनात होती हैं (कथन 5), ये सब राज्यों की स्वायत्तता को सीमित कर एकात्मक झुकाव पैदा करती हैं। इसी कारण
के.सी. व्हीयर ने भारतीय संविधान को .अर्ध-संघीय. (Quasi-Federal) कहा था।
26. भारतीय संविधान की .प्रस्तावना. (Preamble) में प्रयुक्त .गणराज्य. (Republic) शब्द के वास्तविक निहितार्थ के
संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसका अर्थ है कि राज्य का प्रमुख (जैसे राष्ट्रपति) हमेशा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से एक निश्चित अवधि के लिए चुना
जाता है, न कि वंशानुगत आधार पर।
2. इसमें राजनीतिक संप्रभुता (Political Sovereignty) किसी एक राजा या व्यक्ति के हाथ में होने के बजाय देश की
जनता में निहित होती है।
3. इसका अर्थ किसी भी विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग (Privileged Class) की अनुपस्थिति भी है, जिसके तहत सभी
सार्वजनिक कार्यालय बिना किसी भेदभाव के सभी नागरिकों के लिए खुले हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
A. केवल 1 और 2
B. केवल 2 और 3
C. केवल 1 और 3
D. 1, 2 और 3
Correct Answer: D
Detailed Analysis & Explanation:
तीनों कथन .गणराज्य. (Republic) की लोकतांत्रिक और संवैधानिक परिभाषा को पूरी तरह स्पष्ट करते हैं। गणतंत्र
का मुख्य अर्थ वंशानुगत शासन (जैसे ब्रिटेन का राजतंत्र) की समाप्ति है, जहाँ राज्य प्रमुख निर्वाचित होता है (कथन
1)। गणतंत्रात्मक व्यवस्था में सर्वोच्च सत्ता किसी राजा के बजाय आम जनता में निहित होती है (कथन 2)। इसके
अलावा, समाज में किसी भी विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग की अनुपस्थिति होती है, जिससे हर नागरिक को बिना किसी
भेदभाव के सर्वोच्च प्रशासनिक या राजनीतिक पद प्राप्त करने का विधिक अधिकार होता है (कथन 3)।
27. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत किसी नए राज्य के गठन या मौजूदा राज्यों की सीमाओं/नामों में परिवर्तन
करने की संसद की शक्ति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऐसा कोई भी विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना संसद के किसी भी सदन में पेश नहीं किया जा सकता।
2. राष्ट्रपति के लिए अनिवार्य है कि वह संबंधित राज्य के विधानमंडल को उस विधेयक पर अपने विचार व्यक्त करने के
लिए निर्दिष्ट करे, और राज्य विधानमंडल के विचार संसद पर बाध्यकारी होते हैं।
3. ऐसे विधेयक को संसद द्वारा विशेष बहुमत (Special Majority) से पारित करना आवश्यक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A. केवल 1
B. केवल 1 और 2
C. केवल 2 और 3
D. 1, 2 और 3
Correct Answer: A
Detailed Analysis & Explanation:
कथन 1 बिल्कुल सही है; अनुच्छेद 3 के तहत राज्यों के पुनर्गठन संबंधी विधेयक केवल राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश
पर ही संसद में आ सकते हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि यद्यपि राष्ट्रपति संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास विधेयक
राय जानने के लिए भेजता है, लेकिन राज्य विधानमंडल द्वारा व्यक्त किए गए विचार या सुझाव संसद पर बिल्कुल
भी .बाध्यकारी नहीं. होते; संसद उन्हें स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है। कथन 3 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 4 स्पष्ट
करता है कि अनुच्छेद 2 और 3 के तहत किए गए परिवर्तन .साधारण विधायी प्रक्रिया. और .साधारण बहुमत.
(Simple Majority) से ही पारित होते हैं, इसके लिए अनुच्छेद 368 की विशेष प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं
होती। इसी कारण भारत को .विनाशी राज्यों का अविनाशी संघ. कहा जाता है।
28. .नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019. (CAA 2019) और संविधान के भाग-2 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों
पर विचार कीजिए:
1. CAA 2019 के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के छह गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदायों को
भारतीय नागरिकता के लिए .देशीकरण द्वारा नागरिकता. (Citizenship by Naturalisation) की अवधि को 11
वर्ष से घटाकर 5 वर्ष कर दिया गया है।
2. यह अधिनियम संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम
के आदिवासी क्षेत्रों तथा .इनर लाइन परमिट. (ILP) प्रणाली के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों पर लागू नहीं होता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A. केवल 1
B. केवल 2
C. 1 और 2 दोनों
D. न तो 1 और न ही 2
Correct Answer: C
Detailed Analysis & Explanation:
दोनों कथन बिल्कुल सही हैं। नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 के तहत तीन पड़ोसी देशों (पाकिस्तान,
बांग्लादेश, अफगानिस्तान) से 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए छह समुदायों (हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी,
ईसाई) के लिए देशीकरण (Naturalisation) द्वारा नागरिकता की शर्त को शिथिल करते हुए भारत में निवास की
अवधि को 11 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष किया गया है। इसके साथ ही, पूर्वोत्तर की स्थानीय संस्कृति और जनसांख्यिकी
की सुरक्षा के लिए इस कानून को छठी अनुसूची के जनजातीय क्षेत्रों (असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम) और इनर
लाइन परमिट (ILP) वाले राज्यों (जैसे अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम, मणिपुर) से बाहर रखा गया है।
29. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 13 के अंतर्गत .विधि. (Law) शब्द की परिभाषा और न्यायिक समीक्षा के दायरे के
संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसके दायरे में संसद या राज्य विधानमंडल द्वारा पारित स्थायी कानून, राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा जारी अध्यादेश
(Ordinances) तथा उप-विधि, नियम या विनियमन (Rules/Regulations) शामिल हैं।
2. इसके अंतर्गत कार्यपालिका के गैर-विधायी स्रोत जैसे रूढ़ि या प्रथाएं (Customs or Usages) शामिल नहीं हैं जो
कानून का बल रखती हैं।
3. सर्वोच्च न्यायालय ने केशवानंद भारती मामले में यह व्यवस्था दी कि संविधान संशोधन (Constitution
Amendment) कोई विधि नहीं है, अतः इसे मूल ढांचे के उल्लंघन के आधार पर भी चुनौती नहीं दी जा सकती।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A. केवल 1
B. केवल 1 और 2
C. केवल 1 और 3
D. 1, 2 और 3
Correct Answer: A
Detailed Analysis & Explanation:
केवल कथन 1 सही है। अनुच्छेद 13(3) के तहत .विधि. में संसद/विधानमंडल के कानून, अध्यादेश, नियम,
उपनियम, अधिसूचनाएं आदि सभी शामिल हैं (कथन 1 सही)। कथन 2 गलत है क्योंकि कानून का बल रखने वाली
सामाजिक रूढ़ियां, प्रथाएं और रीति-रिवाज (Customs and Usages) भी अनुच्छेद 13 के तहत .विधि. के
दायरे में आते हैं और यदि वे मूल अधिकारों का उल्लंघन करते हैं, तो उन्हें अमान्य घोषित किया जा सकता है। कथन
3 गलत है क्योंकि केशवानंद भारती वाद (1973) में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भले ही साधारण अर्थों में
संविधान संशोधन अनुच्छेद 13 की .विधि. नहीं है, परंतु यदि कोई संविधान संशोधन .मूल ढांचे. (Basic
Structure) का उल्लंघन करता है, तो न्यायिक समीक्षा के आधार पर उसे असंवैधानिक घोषित किया जा सकता
है।
30. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत प्राप्त .वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता. (Freedom of
Speech and Expression) पर अनुच्छेद 19(2) के अंतर्गत निम्नलिखित में से किन आधारों पर युक्तियुक्त प्रतिबंध
(Reasonable Restrictions) लगाया जा सकता है?
1. भारत की संप्रभुता और अखंडता (Sovereignty and Integrity of India)
2. न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court)
3. विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध
4. लोक व्यवस्था, शिष्टाचार या सदाचार (Public Order or Morality)
5. लोकहित में सरकार की नीतियों की कड़े शब्दों में रचनात्मक आलोचना
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
A. केवल 1, 2, 3 और 4
B. केवल 1, 2 और 4
C. केवल 2, 3, 4 और 5
D. 1, 2, 3, 4 और 5
Correct Answer: A
Detailed Analysis & Explanation:
अनुच्छेद 19(2) के तहत अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रतिबंध लगाने के केवल 8 विशिष्ट आधार दिए गए हैं: 1.
भारत की संप्रभुता और अखंडता, 2. राज्य की सुरक्षा, 3. विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध, 4. लोक व्यवस्था
(Public Order), 5. शिष्टाचार या सदाचार (Decency or Morality), 6. न्यायालय की अवमानना
(Contempt of Court), 7. मानहानि (Defamation), और 8. अपराध उद्दीपन (Incitement to an
offence)। सरकार की नीतियों की रचनात्मक आलोचना (कथन 5) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है, इस पर
प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता जब तक कि वह विद्रोह या अपराध न भड़काए। अतः कूट A सही है।
31. संविधान के अनुच्छेद 20 के तहत प्राप्त .अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण. (Protection in
respect of conviction for offences) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. .कार्योत्तर विधियों से संरक्षण. (Protection against Ex-post facto law) का सिद्धांत दीवानी (Civil) और
आपराधिक (Criminal) दोनों प्रकार के कानूनों पर समान रूप से लागू होता है।
2. .दोहरे दंड से मुक्ति. (Protection against Double Jeopardy) का अधिकार केवल न्यायालय या न्यायिक
अधिकरण के समक्ष संरक्षण देता है, यह प्रशासनिक या विभागीय अधिकारियों की दंडात्मक कार्यवाही पर लागू नहीं
होता।
3. .अपने विरुद्ध गवाही देने से संरक्षण. (Right against Self-incrimination) के तहत किसी अभियुक्त के अंगूठे का
निशान या रक्त का नमूना देने के लिए मजबूर करना इस अधिकार का उल्लंघन नहीं माना जाता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
A. केवल 1 और 2
B. केवल 2 और 3
C. केवल 1 और 3
D. 1, 2 और 3
Correct Answer: B
Detailed Analysis & Explanation:
कथन 1 गलत है क्योंकि .कार्योत्तर विधियों से संरक्षण. (कि किसी व्यक्ति को अपराध के समय लागू कानून के तहत
ही सजा मिलेगी, बाद में बने कानून से नहीं) केवल .आपराधिक कानूनों. (Criminal Laws) पर लागू होता है।
दीवानी या टैक्स कानूनों को भूतप्रभावी (Retrospective) तिथि से लागू किया जा सकता है। कथन 2 बिल्कुल
सही है; दोहरे दंड से मुक्ति (एक ही अपराध के लिए दो बार सजा नहीं) केवल कोर्ट या ट्रिब्यूनल की सजा पर लागू
है, प्रशासनिक विभाग किसी कर्मचारी को कोर्ट की सजा के साथ-साथ सस्पेंड या बर्खास्त भी कर सकता है। कथन 3
भी सही है; सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भौतिक साक्ष्य जैसे अंगूठे का निशान, हस्ताक्षर या रक्त का नमूना देना
.अपने विरुद्ध गवाही. (Self-incrimination) नहीं माना जाता, क्योंकि यह केवल वैज्ञानिक जांच में सहायता
करता है।
32. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22 के तहत प्राप्त .निवारक निरोध. (Preventive Detention) के संबंध में
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. निवारक निरोध के तहत गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को अधिकतम दो महीने तक बिना सलाहकार बोर्ड (Advisory
Board) की समीक्षा के हिरासत में रखा जा सकता है।
2. निवारक निरोध के तहत हिरासत में लिए गए व्यक्ति को यह जानने का आत्यंतिक अधिकार है कि उसे किन तथ्यों के
आधार पर गिरफ्तार किया गया है, और राज्य लोकहित के नाम पर भी इन तथ्यों को छिपा नहीं सकता।
3. भारत में निवारक निरोध के संबंध में कानून बनाने की अनन्य शक्ति केवल संसद के पास है, राज्यों के पास नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A. केवल 1
B. केवल 1 और 2
C. केवल 2 और 3
D. उपर्युक्त कथनों में से कोई भी सही नहीं है
Correct Answer: D
Detailed Analysis & Explanation:
तीनों कथन गलत हैं (विकल्प D)। कथन 1 गलत है क्योंकि मूल संविधान में यह अवधि 3 महीने थी, जिसे 44वें
संशोधन (1978) द्वारा घटाकर 2 महीने करने का प्रावधान किया गया था, लेकिन वह संशोधन खंड आज तक
प्रभावी रूप से अधिसूचित नहीं हुआ है, इसलिए वर्तमान विधिक स्थिति के अनुसार भी यह अवधि .3 महीने. ही है।
कथन 2 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 22(6) स्पष्ट करता है कि यदि राज्य को लगता है कि तथ्यों को उजागर करना
.लोकहित. (Public Interest) के विरुद्ध है, तो वह उन तथ्यों को कैदी से छिपा सकता है। कथन 3 गलत है
क्योंकि निवारक निरोध समवर्ती सूची (Concurrent List) का विषय भी है; रक्षा, विदेशी मामलों और भारत की
सुरक्षा के लिए केवल संसद कानून बना सकती है, लेकिन लोक व्यवस्था बनाए रखने व आवश्यक आपूर्ति के लिए
राज्य विधानमंडल भी कानून बना सकते हैं (जैसे गुंडा एक्ट, मकोका आदि)।
33. राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) के वर्गीकरण के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-से प्रावधान .उदार-
बौद्धिक. (Liberal-Intellectual Principles) विचारधारा पर आधारित हैं?
1. भारत के समस्त राज्य क्षेत्र में नागरिकों के लिए एक .समान नागरिक संहिता. (Uniform Civil Code) सुनिश्चित
करना।
2. सभी बालकों को छह वर्ष की आयु पूरी करने तक प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख और शिक्षा (Early Childhood
Care and Education) प्रदान करना।
3. कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक प्रणालियों से संगठित करना तथा दुधारू पशुओं के वध पर रोक
लगाना।
4. कार्यपालिका से न्यायपालिका का पृथक्करण (Separation of Judiciary from Executive) सुनिश्चित करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
A. केवल 1, 2 और 4
B. केवल 1 और 4
C. केवल 2, 3 और 4
D. 1, 2, 3 और 4
Correct Answer: D
Detailed Analysis & Explanation:
नीति निर्देशक तत्वों को अध्ययन की सुविधा के लिए तीन विचारधाराओं में बांटा गया है: समाजवादी, गांधीवादी
और उदार-बौद्धिक। उपर्युक्त सभी चारों प्रावधान .उदार-बौद्धिक. (Liberal-Intellectual) सिद्धांतों के अंतर्गत
आते हैं: अनुच्छेद 44 (समान नागरिक संहिता – कथन 1), अनुच्छेद 45 (6 वर्ष से कम आयु के बच्चों की शिक्षा –
कथन 2), अनुच्छेद 48 (वैज्ञानिक कृषि एवं दुधारू पशुओं की रक्षा – कथन 3), और अनुच्छेद 50 (कार्यपालिका से
न्यायपालिका का पृथक्करण – कथन 4)। अतः विकल्प D सही है।
34. भारत के राष्ट्रपति के महाभियोग (Impeachment) की प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार
कीजिए:
1. महाभियोग का प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में शुरू किया जा सकता है, बशर्ते इस पर उस सदन के कम से कम
एक-चौथाई (1/4) सदस्यों के हस्ताक्षर हों।
2. संसद के दोनों सदनों के मनोनीत सदस्य (Nominated Members), जो राष्ट्रपति के चुनाव में भाग नहीं लेते, वे
महाभियोग की प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं।
3. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (दिल्ली व पुदुचेरी) की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य महाभियोग की प्रक्रिया में
भाग लेते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
A. केवल 1 और 2
B. केवल 2 और 3
C. केवल 1 और 3
D. 1, 2 और 3
Correct Answer: A
Detailed Analysis & Explanation:
कथन 1 और 2 बिल्कुल सही हैं। अनुच्छेद 61 के तहत महाभियोग प्रस्ताव किसी भी सदन में आ सकता है और 1/4
सदस्यों का लिखित समर्थन व 14 दिन का नोटिस आवश्यक है (कथन 1 सही)। संसद के मनोनीत सदस्य राष्ट्रपति के
चुनाव में तो वोट नहीं डालते, लेकिन महाभियोग की प्रक्रिया में उन्हें वोट डालने का पूर्ण अधिकार होता है (कथन 2
सही)। कथन 3 गलत है क्योंकि राज्य विधानसभाओं और दिल्ली व पुदुचेरी विधानसभा के सदस्य राष्ट्रपति के चुनाव
में तो निर्वाचक मंडल का हिस्सा होते हैं, परंतु वे महाभियोग (Impeachment) की प्रक्रिया में बिल्कुल भी भाग
नहीं लेते। महाभियोग केवल संसद के दोनों सदनों द्वारा अपने .कुल बहुमत के 2/3. (Special Majority) से पूरा
किया जाता है।
35. भारत के राष्ट्रपति की .अध्यादेश जारी करने की शक्ति. (Ordinance Making Power – अनुच्छेद 123) के
संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति अध्यादेश केवल तभी जारी कर सकता है जब संसद के दोनों सदनों का सत्र न चल रहा हो; यदि एक सदन
सत्र में हो तो अध्यादेश जारी नहीं किया जा सकता।
2. कूपर वाद (1970) के अनुसार, राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की संतुष्टि (Satisfaction) को इस आधार पर
न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है कि वह दुर्भावनापूर्ण या राजनीतिक लाभ के लिए की गई थी।
3. संसद के पुनः संवेत (Reassemble) होने पर अध्यादेश को 6 सप्ताह के भीतर मंजूरी मिलना आवश्यक है, अन्यथा
वह समाप्त हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
A. केवल 1 और 2
B. केवल 2 और 3
C. केवल 1 और 3
D. 1, 2 और 3
Correct Answer: B
Detailed Analysis & Explanation:
कथन 1 गलत है क्योंकि अध्यादेश तब भी जारी किया जा सकता है जब केवल एक ही सदन सत्र में हो, क्योंकि कोई
भी कानून अकेले एक सदन द्वारा पारित नहीं हो सकता। संसद के दोनों सदनों में से किसी एक या दोनों का सत्र न
चलने पर अध्यादेश आ सकता है। कथन 2 बिल्कुल सही है; कूपर वाद (1970) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति
की .संतुष्टि. न्यायिक समीक्षा के अधीन है। कथन 3 भी सही है; संसद का सत्र शुरू होने के बाद अध्यादेश की
अधिकतम अवधि 6 सप्ताह (42 दिन) होती है। यदि इस बीच संसद इसे खारिज कर दे तो यह पहले भी समाप्त हो
सकता है। संसद के दो सत्रों के बीच अधिकतम 6 माह का अंतर होता है, अतः किसी अध्यादेश का अधिकतम
जीवनकाल 6 महीने + 6 सप्ताह हो सकता है।
36. केंद्रीय मंत्रिपरिषद के आकार को सीमित करने वाले .91वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003. के प्रावधानों के
संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रधानमंत्री सहित मंत्रिपरिषद के कुल मंत्रियों की संख्या लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं
होनी चाहिए।
2. यह नियम राज्यों के मुख्यमंत्री और वहां के मंत्रिपरिषद पर भी लागू होता है, बशर्ते किसी राज्य में मंत्रियों की न्यूनतम
संख्या 12 से कम नहीं होगी।
3. दल-बदल (Defection) के आधार पर अयोग्य घोषित किया गया संसद या विधानसभा का कोई भी सदस्य मंत्री पद
के लिए भी अयोग्य हो जाएगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
A. केवल 1 और 2
B. केवल 2 और 3
C. केवल 1 और 3
D. 1, 2 और 3
Correct Answer: D
Detailed Analysis & Explanation:
तीनों कथन बिल्कुल सही हैं। 91वें संविधान संशोधन, 2003 द्वारा केंद्र और राज्यों में .जंबो मंत्रिमंडल. (अत्यधिक
बड़े मंत्रिपरिषद) पर रोक लगाने के लिए यह सीमा तय की गई कि मंत्रियों की कुल संख्या (प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री
सहित) लोकसभा/विधानसभा की कुल सीट के 15% से अधिक नहीं होगी (कथन 1 और 2 सही)। छोटे राज्यों के
लिए मुख्यमंत्री सहित न्यूनतम 12 मंत्री तय किए गए हैं। साथ ही, यदि 10वीं अनुसूची के तहत कोई सदस्य अयोग्य
होता है, तो वह लाभ का राजनीतिक पद या मंत्री पद प्राप्त करने के लिए भी तब तक अयोग्य रहेगा जब तक वह
दोबारा चुनकर नहीं आता (कथन 3 सही)।
37. .संसद के सत्र. और विधायी प्रक्रियाओं के संदर्भ में, लोकसभा के .विघटन. (Dissolution) पर विधेयकों के व्यपगत
(Lapse/समाप्त) होने के नियमों के संबंध में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. राज्यसभा में लंबित विधेयक, जिसे लोकसभा ने पारित नहीं किया हो : व्यपगत (Lapse) हो जाता है।
2. लोकसभा में लंबित विधेयक (चाहे वह लोकसभा में पेश हुआ हो या राज्यसभा द्वारा पारित होकर आया हो) : व्यपगत
(Lapse) हो जाता है।
3. ऐसा विधेयक जिसे दोनों सदनों द्वारा पारित किया जा चुका हो और राष्ट्रपति की सहमति के लिए लंबित हो : व्यपगत
नहीं होता।
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
A. केवल 1 और 2
B. केवल 2
C. केवल 2 और 3
D. 1, 2 और 3
Correct Answer: C
Detailed Analysis & Explanation:
युग्म 2 और 3 बिल्कुल सही सुमेलित हैं, जबकि युग्म 1 गलत है। लोकसभा के विघटन (Dissolution) पर
विधेयकों के समाप्त होने के नियम इस प्रकार हैं:
– जो विधेयक राज्यसभा में उत्पन्न हुआ और राज्यसभा में ही लंबित है, तथा लोकसभा ने अभी तक उस पर विचार
या उसे पारित नहीं किया है, वह लोकसभा भंग होने पर .व्यपगत नहीं होता. (Lapse नहीं होता)। अतः युग्म 1
गलत सुमेलित है।
– लोकसभा में लंबित सभी विधेयक (चाहे वे लोकसभा के अपने हों या राज्यसभा से पास होकर आए हों) स्वतः
समाप्त हो जाते हैं (युग्म 2 सही)।
– जो विधेयक दोनों सदनों से पास होकर राष्ट्रपति की टेबल पर सहमति के लिए रुके हैं, वे भंग होने पर समाप्त नहीं
होते, नई लोकसभा के समय भी राष्ट्रपति उन पर निर्णय ले सकता है (युग्म 3 सही)।
38. भारतीय संसद में प्रयुक्त विभिन्न प्रकार के .कटौती प्रस्तावों. (Cut Motions) के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर
विचार कीजिए:
1. नीति कटौती प्रस्ताव (Policy Cut Motion) : इसके तहत मांग की राशि को घटाकर 1 रुपया कर दिया जाता है,
जो नीति के प्रति पूर्ण असहमति दर्शाता है।
2. आर्थिक कटौती प्रस्ताव (Economy Cut Motion) : इसके तहत मांग की राशि में से एक निर्दिष्ट राशि (एक
निश्चित राशि) कम करने का प्रस्ताव होता है ताकि खर्च में मितव्ययिता लाई जा सके।
3. प्रतीक कटौती प्रस्ताव (Token Cut Motion) : इसके तहत मांग की राशि में से 100 रुपये कम किए जाते हैं, जो
किसी विशिष्ट शिकायत को प्रदर्शित करता है।
उपर्युक्त युग्मों में से कितने सही सुमेलित हैं?
A. केवल एक युग्म
B. केवल दो युग्म
C. सभी तीनों युग्म
D. कोई भी युग्म सुमेलित नहीं है
Correct Answer: C
Detailed Analysis & Explanation:
सभी तीनों युग्म बिल्कुल सही सुमेलित हैं। बजट सत्र में अनुदान की मांगों पर नियंत्रण के लिए विपक्ष तीन प्रकार के
कटौती प्रस्ताव लाता है:
1. नीति कटौती (Policy Cut): इसमें लिखा जाता है कि .मांग की राशि घटाकर 1 रुपया कर दी जाए.। यह
सरकार की मूल नीति को खारिज करने का प्रतीक है।
2. आर्थिक कटौती (Economy Cut): इसमें मांग की राशि में से कोई निश्चित रकम (जैसे 50,000 या 5 लाख
रुपये) कम करने को कहा जाता है ताकि बजट को तर्कसंगत बनाया जा सके।
3. प्रतीक कटौती (Token Cut): इसमें .मांग की राशि में से 100 रुपये कम करने. का प्रस्ताव होता है, इसका
उद्देश्य किसी विशेष शिकायत या मुद्दे पर सदन का ध्यान खींचना होता है।
39. भारतीय संसद की .प्राकलन समिति. (Estimates Committee) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार
कीजिए:
1. इस समिति की उत्पत्ति स्वतंत्रता के बाद जॉन मथाई की सिफारिश पर वर्ष 1950 में हुई थी।
2. इसके सभी 30 सदस्य अनिवार्य रूप से केवल लोकसभा से चुने जाते हैं, इसमें राज्यसभा का कोई प्रतिनिधित्व नहीं
होता।
3. इस समिति का कार्यकाल दो वर्ष का होता है और कोई भी मंत्री इसका सदस्य नहीं बन सकता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
A. केवल 1 और 2
B. केवल 2 और 3
C. केवल 1 and 3
D. 1, 2 और 3
Correct Answer: A
Detailed Analysis & Explanation:
कथन 1 और 2 बिल्कुल सही हैं। प्राकलन समिति का गठन स्वतंत्रता के बाद पहली बार तत्कालीन वित्त मंत्री जॉन
मथाई की सिफारिश पर 1950 में हुआ था (कथन 1 सही)। इसमें कुल 30 सदस्य होते हैं और ये सभी केवल
लोकसभा से ही आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली द्वारा चुने जाते हैं (कथन 2 सही)। कथन 3 गलत है क्योंकि इस
समिति (और अन्य वित्तीय समितियों) का कार्यकाल केवल .एक वर्ष. का होता है, न कि दो वर्ष का। यह व्यवस्था
सही है कि कोई भी मंत्री इस समिति का चुनाव नहीं लड़ सकता और यदि कोई सदस्य मंत्री बन जाता है तो वह
समिति से स्वतः हट जाता है।
40. सर्वोच्च न्यायालय के .सलाहकारी क्षेत्राधिकार. (Advisory Jurisdiction – अनुच्छेद 143) के संदर्भ में
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति द्वारा सार्वजनिक महत्व के किसी विधिक या तथ्यात्मक प्रश्न पर मांगी गई राय पर सर्वोच्च न्यायालय राय देने
के लिए संवैधानिक रूप से बाध्य है।
2. संविधान-पूर्व की संधियों, समझौतों या सनदों से उत्पन्न किसी विवाद पर यदि राष्ट्रपति राय मांगता है, तो न्यायालय
राय देने के लिए बाध्य होता है।
3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दी गई ऐसी कोई भी सलाह या राय राष्ट्रपति पर कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होती।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
A. केवल 1 और 2
B. केवल 2 और 3
C. केवल 1 और 3
D. 1, 2 और 3
Correct Answer: B
Detailed Analysis & Explanation:
कथन 2 और 3 सही हैं, जबकि कथन 1 गलत है। अनुच्छेद 143 के तहत दो अलग मामले हैं:
– श्रेणी 1 (सार्वजनिक महत्व का कानूनी प्रश्न): इसमें सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रपति को राय देने से .इनकार कर सकता है.
(जैसे बाबरी मस्जिद मामले में कोर्ट ने राय देने से मना कर दिया था), अतः कथन 1 गलत है।
– श्रेणी 2 (संविधान-पूर्व की संधि/समझौता विवाद): इस विशिष्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट राय देने के लिए .बाध्य है.,
वह मना नहीं कर सकता (कथन 2 सही)।
– दोनों ही मामलों में, सुप्रीम कोर्ट की राय केवल एक .सलाह. होती है, राष्ट्रपति उसे मानने के लिए कानूनी रूप से
.बाध्य नहीं. होता (कथन 3 सही)।
41. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 142 के तहत अपनी .पूर्ण न्याय करने की अंतर्निहित शक्ति. (Inherent Power
to do Complete Justice) के प्रयोग के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अनुच्छेद के तहत दिया गया आदेश देश के पूरे क्षेत्र में तब तक लागू होता है जब तक संसद द्वारा इस संबंध में कोई
कानून न बना दिया जाए।
2. सर्वोच्च न्यायालय इस शक्ति का प्रयोग करके संसद द्वारा पारित किसी स्पष्ट वैधानिक कानून (Statutory Law) के
मूल प्रावधानों को पूरी तरह दरकिनार या शून्य नहीं कर सकता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A. केवल 1
B. केवल 2
C. 1 और 2 दोनों
D. न तो 1 और न ही 2
Correct Answer: C
Detailed Analysis & Explanation:
दोनों कथन सही हैं। अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को किसी लंबित मामले में .पूर्ण न्याय. (Complete Justice)
करने के लिए अद्वितीय डिक्री या आदेश जारी करने की शक्ति देता है (जैसे अयोध्या विवाद या भोपाल गैस त्रासदी
मामला)। यह कानून की तरह तब तक प्रवर्तनीय रहता है जब तक संसद कानून न बनाए (कथन 1 सही)। हालांकि,
हाल के न्यायिक निर्णयों (जैसे सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन केस) में कोर्ट ने माना है कि अनुच्छेद 142 की शक्तियां
असीमित होने के बावजूद, इनका प्रयोग संसद द्वारा बनाए गए किसी स्पष्ट और वैध कानून के मूल वैधानिक
प्रावधानों को नष्ट करने या पूरी तरह दरकिनार करने के लिए नहीं किया जा सकता (कथन 2 सही)।
42. .उच्च न्यायालयों. (High Courts) के क्षेत्राधिकार और शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संसद कानून बनाकर किसी भी उच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार का विस्तार किसी केंद्र शासित प्रदेश (UT) पर कर
सकती है या उसे वहां से बाहर कर सकती है।
2. दो या अधिक राज्यों के लिए एक ही .साझा उच्च न्यायालय. (Common High Court) स्थापित करने की शक्ति
केवल भारत के राष्ट्रपति के पास है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A. केवल 1
B. केवल 2
C. 1 और 2 दोनों
D. न तो 1 और न ही 2
Correct Answer: A
Detailed Analysis & Explanation:
कथन 1 बिल्कुल सही है; अनुच्छेद 230 के तहत संसद को यह अधिकार प्राप्त है कि वह कानून बनाकर किसी हाई
कोर्ट के क्षेत्राधिकार को किसी संघ राज्य क्षेत्र पर बढ़ा सकती है या सीमित कर सकती है। कथन 2 गलत है क्योंकि
अनुच्छेद 231 के अनुसार, दो या अधिक राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक .साझा उच्च न्यायालय.
(Common High Court) स्थापित करने की अनन्य शक्ति .संसद. (Parliament) के पास है, न कि राष्ट्रपति के
पास। यह प्रावधान 7वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1956 द्वारा जोड़ा गया था।
43. भारतीय संविधान के .अनुच्छेद 239-कक. (239AA) के तहत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (NCT Delhi) के
विशेष प्रशासनिक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दिल्ली विधानसभा को राज्य सूची (State List) के सभी विषयों पर कानून बनाने की पूर्ण शक्ति प्राप्त है।
2. लोक व्यवस्था (Public Order), पुलिस (Police) और भूमि (Land) के विषय दिल्ली विधानसभा के विधायी
दायरे से बाहर हैं और ये सीधे केंद्र सरकार के अधीन हैं।
3. दिल्ली के मुख्यमंत्री की नियुक्ति दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) द्वारा की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A. केवल 2
B. केवल 1 और 2
C. केवल 2 और 3
D. 1, 2 और 3
Correct Answer: A
Detailed Analysis & Explanation:
केवल कथन 2 सही है। 69वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1991 द्वारा अनुच्छेद 239-कक जोड़ा गया। कथन 1
गलत है क्योंकि दिल्ली विधानसभा राज्य सूची के सभी विषयों पर कानून नहीं बना सकती, उसे तीन महत्वपूर्ण
विषयों से बाहर रखा गया है। कथन 2 बिल्कुल सही है; .लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि. ये तीनों विषय दिल्ली
सरकार के पास नहीं हैं, इन पर कानून बनाने और नियंत्रण का अनन्य अधिकार संसद और केंद्र सरकार का है। कथन
3 गलत है क्योंकि दिल्ली के मुख्यमंत्री की नियुक्ति उपराज्यपाल नहीं करता, बल्कि .भारत के राष्ट्रपति. द्वारा
मुख्यमंत्री की नियुक्ति की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति उपराज्यपाल की सलाह पर करता है।
44. भारतीय संविधान की .सातवीं अनुसूची. (Seventh Schedule) के अंतर्गत .समवर्ती सूची. (Concurrent
List) में निम्नलिखित में से कौन-से विषय शामिल हैं?
1. शिक्षा (Education)
2. वन (Forests)
3. विवाह और तलाक (Marriage and Divorce)
4. दिवाला और शोधन अक्षमता (Bankruptcy and Insolvency)
5. कृषि भूमि पर संपदा शुल्क (Estate Duty on Agricultural Land)
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
A. केवल 1, 2, 3 और 4
B. केवल 1, 2 और 3
C. केवल 2, 4 और 5
D. 1, 2, 3, 4 और 5
Correct Answer: A
Detailed Analysis & Explanation:
विषय 1 से 4 समवर्ती सूची के अंतर्गत आते हैं। 42वें संविधान संशोधन, 1976 द्वारा पांच विषयों को राज्य सूची से
समवर्ती सूची में स्थानांतरित किया गया था: शिक्षा (1), वन (2), वन्यजीवों व पक्षियों का संरक्षण, नाप और तौल,
तथा अधीनस्थ न्यायालयों का प्रशासन। विवाह, तलाक, गोद लेना (3) तथा दिवालापन (4) भी शुरू से समवर्ती
सूची में हैं। विषय 5 .कृषि भूमि पर संपदा शुल्क. पूरी तरह से .राज्य सूची. (State List – प्रविष्टि 48) का विषय
है। अतः कूट A सही है।
45. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 249 और अनुच्छेद 250 के तहत .राज्य सूची के विषयों पर संसद की विधायी शक्ति.
के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 249 के तहत यदि राज्यसभा राष्ट्रीय हित में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत
से प्रस्ताव पास कर दे, तो संसद राज्य सूची पर कानून बना सकती है।
2. अनुच्छेद 250 के तहत राष्ट्रीय आपातकाल लागू होने पर संसद स्वतः राज्य सूची के विषयों पर कानून बनाने की शक्ति
प्राप्त कर लेती है।
3. इन दोनों अनुच्छेदों के तहत संसद द्वारा बनाए गए कानून संबंधित परिस्थिति (प्रस्ताव का अंत या आपातकाल की
समाप्ति) के समाप्त होने के छह महीने बाद स्वतः निष्प्रभावी हो जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
A. केवल 1 और 2
B. केवल 2 और 3
C. केवल 1 और 3
D. 1, 2 और 3
Correct Answer: D
Detailed Analysis & Explanation:
तीनों कथन बिल्कुल सही हैं। अनुच्छेद 249 राज्यसभा को यह विशेष अधिकार देता है कि वह राष्ट्रीय हित में विशेष
बहुमत से प्रस्ताव पास कर संसद को राज्य सूची पर कानून बनाने का अधिकार दे (ऐसा कानून एक बार में 1 वर्ष
प्रभावी रहता है) (कथन 1 सही)। अनुच्छेद 250 के तहत जब देश में राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) लागू हो,
तो संसद को राज्य सूची पर कानून बनाने का संपूर्ण अधिकार मिल जाता है (कथन 2 सही)। इन दोनों मामलों में
समानता यह है कि जैसे ही वह आपातकाल खत्म होता है या राज्यसभा के प्रस्ताव की अवधि समाप्त होती है, उसके
.6 महीने बाद. संसद द्वारा बनाया गया वह कानून स्वतः समाप्त (Lapse) हो जाता है (कथन 3 सही)।
46. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 268 से 271 के तहत .केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों. (Tax Distribution) के संदर्भ में
निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है?
A. संघ द्वारा लगाए गए किन्तु राज्यों द्वारा एकत्रित और विनियोजित किए जाने वाले कर (जैसे स्टाम्प शुल्क) :
अनुच्छेद 268
B. संघ द्वारा लगाए जाने वाले और एकत्र किए जाने वाले कर, जो राज्यों को सौंप दिए जाते हैं : अनुच्छेद 280
C. संघ और राज्यों के बीच विभाजित किए जाने वाले कर (जैसे केंद्रीय आयकर) : अनुच्छेद 265
D. किसी भी कर पर केवल राज्यों के हित के लिए संसद द्वारा लगाया जाने वाला अधिभार (Surcharge) :
अनुच्छेद 271
Correct Answer: A
Detailed Analysis & Explanation:
केवल विकल्प A सही सुमेलित है। अनुच्छेद 268 के तहत ऐसे कर आते हैं जो केंद्र लगाता है लेकिन राज्य उन्हें
वसूलते और अपने पास रखते हैं (जैसे स्टाम्प ड्यूटी)। विकल्प B गलत है क्योंकि संघ द्वारा लगाए व एकत्र किए
जाने वाले तथा राज्यों को सौंपे जाने वाले कर अनुच्छेद 269 में आते हैं (अनुच्छेद 280 तो वित्त आयोग का है)।
विकल्प C गलत है क्योंकि केंद्र-राज्य के बीच करों का विभाजन (जैसे नेट प्रोसीड्स) अनुच्छेद 270 के तहत होता है
(अनुच्छेद 265 तो केवल यह कहता है कि बिना कानून के कोई टैक्स नहीं लगेगा)। विकल्प D गलत है क्योंकि
अनुच्छेद 271 के तहत करों पर लगाया जाने वाला अधिभार (Surcharge) केवल .केंद्र सरकार/संघ के प्रयोजनों
के लिए. होता है, राज्यों के लिए नहीं।
47. भारत के .वित्त आयोग. (Finance Commission – अनुच्छेद 280) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार
कीजिए:
1. यह एक अर्ध-न्यायिक (Quasi-judicial) संवैधानिक निकाय है, जिसके अध्यक्ष और चारों सदस्यों की योग्यताएं
संविधान में स्पष्ट रूप से परिभाषित की गई हैं।
2. संविधान संसद को यह शक्ति देता है कि वह आयोग के सदस्यों की अहर्ताओं (Qualifications) और चयन की विधि
का निर्धारण कानून द्वारा करे।
3. वित्त आयोग की सिफारिशें प्रकृति में केवल सलाहकारी (Advisory) होती हैं और सरकार उन्हें मानने के लिए
कानूनी रूप से बाध्य नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
A. केवल 1 और 2
B. केवल 2 और 3
C. केवल 1 और 3
D. 1, 2 और 3
Correct Answer: B
Detailed Analysis & Explanation:
कथन 2 और 3 सही हैं, जबकि कथन 1 गलत है। वित्त आयोग एक अर्ध-न्यायिक संवैधानिक निकाय है, लेकिन इसके
सदस्यों की विस्तृत योग्यताएं .संविधान में नहीं लिखी गई हैं. (अतः कथन 1 गलत है)। अनुच्छेद 280(2) संसद को
यह अधिकार देता है कि वह कानून बनाकर योग्यताएं तय करे। संसद ने इसी शक्ति का प्रयोग करके .वित्त आयोग
अधिनियम, 1951. पारित किया, जिसमें अध्यक्ष (सार्वजनिक मामलों का ज्ञाता) और 4 सदस्यों (हाई कोर्ट जज
बनने योग्य, वित्तीय मामलों के विशेषज्ञ आदि) की योग्यताएं तय की गईं (कथन 2 सही)। चौथी राष्ट्रीय कमिटी और
न्यायिक निर्णयों के अनुसार वित्त आयोग की सिफारिशें केवल सलाहकारी होती हैं, केंद्र सरकार इन्हें पूरी तरह
खारिज या आंशिक रूप से लागू करने के लिए स्वतंत्र है (कथन 3 सही)।
48. भारतीय संविधान के .भाग XIV. के तहत स्थापित .अखिल भारतीय सेवाओं. (All India Services) के संदर्भ में
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल संविधान में केवल दो अखिल भारतीय सेवाएं थीं: भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा
(IPS)।
2. वर्ष 1966 में संसद द्वारा एक कानून के माध्यम से .भारतीय वन सेवा. (IFS) को तीसरी अखिल भारतीय सेवा के रूप
में स्थापित किया गया।
3. अनुच्छेद 312 के तहत संसद को किसी नई अखिल भारतीय सेवा के गठन की शक्ति प्राप्त है, बशर्ते लोकसभा इस संबंध
में विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित करे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
A. केवल 1 और 2
B. केवल 2 और 3
C. केवल 1 और 3
D. 1, 2 और 3
Correct Answer: A
Detailed Analysis & Explanation:
कथन 1 और 2 बिल्कुल सही हैं। मूल संविधान में केवल आईएएस और आईपीएस दो ही अखिल भारतीय सेवाएं थीं।
1966 में .भारतीय वन सेवा. (Indian Forest Service – IFS) को तीसरी अखिल भारतीय सेवा बनाया गया
(कथन 1 और 2 सही)। कथन 3 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 312 के तहत नई अखिल भारतीय सेवा का प्रस्ताव पास
करने का अनन्य अधिकार .लोकसभा. के पास नहीं, बल्कि .राज्यसभा. (Council of States) के पास है। जब
राज्यसभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई (2/3) बहुमत से ऐसा संकल्प पारित करती है,
तभी संसद कानून बनाकर नई सेवा (जैसे अखिल भारतीय न्यायिक सेवा) का गठन कर सकती है।
49. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 323-क (323A) और 323-ख (323B) के तहत स्थापित .अधिकरणों.
(Tribunals) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 323-क के तहत प्रशासनिक अधिकरण (जैसे CAT) की स्थापना केवल संसद द्वारा की जा सकती है, जबकि
अनुच्छेद 323-ख के तहत अन्य विषयों (जैसे कर, श्रम, भूमि सुधार) के लिए अधिकरण संसद और राज्य विधानमंडल
दोनों बना सकते हैं।
2. चंद्र कुमार मामले (1997) में सर्वोच्च न्यायालय ने व्यवस्था दी कि इन अधिकरणों के निर्णयों के विरुद्ध सीधे उच्च
न्यायालय (High Court) की खंडपीठ में अपील की जा सकती है, क्योंकि न्यायिक समीक्षा मूल ढांचा है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A. केवल 1
B. केवल 2
C. 1 और 2 दोनों
D. न तो 1 और न ही 2
Correct Answer: C
Detailed Analysis & Explanation:
दोनों कथन बिल्कुल सही हैं। 42वें संविधान संशोधन, 1976 द्वारा संविधान में .भाग XIV-क. जोड़कर ट्रिब्यूनल का
प्रावधान किया गया। अनुच्छेद 323A केवल लोक सेवाओं/प्रशासनिक विवादों के लिए है और इसके तहत ट्रिब्यूनल
(जैसे केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण – CAT) बनाने का अधिकार केवल .संसद. को है। अनुच्छेद 323B अन्य कर,
विदेशी मुद्रा, श्रम विवादों के लिए है जिस पर संसद और राज्य दोनों अपनी विधायी शक्तियों के अनुसार ट्रिब्यूनल
बना सकते हैं (कथन 1 सही)। एल. चंद्र कुमार वाद (1997) में सुप्रीम कोर्ट ने उस पुराने नियम को असंवैधानिक
घोषित कर दिया जिसके तहत ट्रिब्यूनल के फैसलों के खिलाफ हाई कोर्ट जाने पर रोक थी। कोर्ट ने कहा कि पीड़ित
व्यक्ति पहले अनुच्छेद 226/227 के तहत संबंधित हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच में जाएगा, उसके बाद ही सुप्रीम कोर्ट
आ सकता है, क्योंकि न्यायिक समीक्षा बुनियादी ढांचा है।
50. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत .राष्ट्रीय आपातकाल. (National Emergency) के उद्घोषणा के
प्रभाव के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब युद्ध या बाहरी आक्रमण के आधार पर आपातकाल लागू हो, तो अनुच्छेद 19 के तहत प्राप्त छह मौलिक अधिकार
स्वतः निलंबित (Automatically Suspended) हो जाते हैं।
2. यदि आपातकाल की घोषणा .सशस्त्र विद्रोह. (Armed Rebellion) के आधार पर की गई हो, तो अनुच्छेद 19 के
अधिकारों को किसी भी स्थिति में निलंबित नहीं किया जा सकता।
3. आपातकाल के दौरान राष्ट्रपति अनुच्छेद 20 और 21 के तहत प्राप्त मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन (Enforcement)
को न्यायालय में निलंबित नहीं कर सकता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
A. केवल 1 और 2
B. केवल 2 और 3
C. केवल 1 और 3
D. 1, 2 और 3
Correct Answer: D
Detailed Analysis & Explanation:
तीनों कथन बिल्कुल सही हैं और मौलिक अधिकारों पर आपातकाल के प्रभाव (अनुच्छेद 358 और 359) को दर्शाते
हैं। 44वें संशोधन (1978) द्वारा इसमें महत्वपूर्ण सीमाएं तय की गईं:
– अनुच्छेद 358 के अनुसार, यदि आपातकाल .युद्ध या बाहरी आक्रमण. (External Emergency) के आधार पर
लगा है, तो अनुच्छेद 19 स्वतः निलंबित हो जाता है (कथन 1 सही)। लेकिन यदि यह .सशस्त्र विद्रोह. (Internal
Emergency) के आधार पर लगा है, तो अनुच्छेद 19 निलंबित नहीं होता (कथन 2 सही)।
– अनुच्छेद 359 राष्ट्रपति को अन्य मूल अधिकारों के न्यायालय द्वारा प्रवर्तन को रोकने की शक्ति देता है, परंतु 44वें
संशोधन के बाद यह स्पष्ट कर दिया गया है कि राष्ट्रपति किसी भी स्थिति में .अनुच्छेद 20 (दोषसिद्धि से संरक्षण)
और अनुच्छेद 21 (प्राण और दैहिक स्वतंत्रता). के अधिकारों को निलंबित या प्रभावित नहीं कर सकता (कथन 3
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