hindi mcq pdf with answers 05
🎯 Hindi MCQ PDF with Answers: हिंदी व्याकरण स्पेशल मॉक टेस्ट (प्रैक्टिस सेट – 05)
क्या आप UP Police, UPSI, SSC GD, RO/ARO, TET या अन्य किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं और हिंदी में पूरे अंक (Full Marks) लाना चाहते हैं? यदि हाँ, तो आपकी तैयारी को परखने और उसे और भी मजबूत बनाने के लिए हम लेकर आए हैं Hindi MCQ PDF with Answers (प्रैक्टिस सेट – 05)।
इस मॉक टेस्ट में हिंदी व्याकरण (व्यंजन संधि, अव्ययीभाव समास, तद्भव-तत्सम, शुद्ध वर्तनी), काव्यशास्त्र (अलंकार, रस, छंद) और हिंदी साहित्य के इतिहास से 25 अति-महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्नों (MCQs) को शामिल किया गया है। यह प्रैक्टिस सेट पूरी तरह से नवीनतम परीक्षा पैटर्न और सिलेबस पर आधारित है।
📌 इस हिंदी प्रैक्टिस सेट की मुख्य विशेषताएं:
Mix Topics: सभी अध्यायों से चुने गए परीक्षा उपयोगी प्रश्न।
Detailed Explanation: हर प्रश्न के नीचे उसकी विस्तृत व्याख्या दी गई है ताकि आपके कॉन्सेप्ट्स बिल्कुल क्लियर हो सकें।
Free PDF Download: छात्र अपनी सुविधा के लिए इस Hindi MCQ Practice Set 05 को PDF के रूप में भी डाउनलोड कर सकते हैं।
💡 सफलता का मूलमंत्र: परीक्षा हॉल में होने वाली सिली मिस्टेक्स (Silly Mistakes) से बचने का एकमात्र तरीका है — निरंतर और सटीक अभ्यास!
नीचे दिए गए 25 प्रश्नों को पूरे ध्यान से हल करें और देखें कि आज आप इस चैलेंजिंग सेट में कितना स्कोर कर पाते हैं।
“दम है तो आज के इस 25 प्रश्नों के लाइव टेस्ट में 20+ सही करके दिखाओ!” 🔥
यहाँ व्यंजन संधि का नियम लागू होता है। नियम के अनुसार यदि 'त' या 'द' के बाद 'श' आए, तो 'त/द' का 'च्' और 'श' का 'छ्' हो जाता है। अतः उत् + श्वास = उच्छ्वास।
जिस समास का पहला पद अव्यय या उपसर्ग हो और वही प्रधान हो, वहाँ अव्ययीभाव समास होता है। 'यथाशक्ति' का विग्रह 'शक्ति के अनुसार' होता है, जहाँ 'यथा' अव्यय है।
'दिनकर', 'दिवाकर' और 'प्रभाकर' सूर्य के पर्यायवाची शब्द हैं, जबकि 'हिमांशु' चन्द्रमा का पर्यायवाची शब्द है।
'शलाका' एक तत्सम (संस्कृत) शब्द है जिसका समय के साथ बदला हुआ हिंदी तद्भव रूप 'सलाई' होता है।
'स्थावर' का अर्थ होता है जो एक ही स्थान पर टिका रहे (स्थिर), और इसका सटीक विलोम 'जंगम' होता है, जिसका अर्थ होता है जो चल सकता हो (गतिशील)।
जिस बात या घटना की पहले से कोई उम्मीद या आशा न की गई हो, उसे 'अप्रत्याशित' कहा जाता है। जो आशा से अधिक हो उसे 'आशातीत' कहते हैं।
इस मुहावरे का अर्थ होता है किसी असहाय या लाचार व्यक्ति के लिए 'एकमात्र सहारा' होना, जैसे अंधे व्यक्ति के लिए उसकी लाठी होती है।
यहाँ 'त' वर्ण की आवृत्ति बार-बार हुई है। हिंदी व्याकरण के नियम के अनुसार जहाँ एक ही वर्ण की आवृत्ति बार-बार होती है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।
जब किसी कठिन कार्य को करने या युद्ध के लिए हृदय में जो उमंग और जोश जाग्रत होता है, वहाँ वीर रस की निष्पत्ति होती है। इसका स्थायी भाव 'उत्सार' है।
दोहा एक मात्रिक अर्द्धसम छंद है। इसके पहले और तीसरे (विषम) चरणों में 13-13 मात्राएँ तथा दूसरे और चौथे (सम) चरणों में 11-11 मात्राएँ होती हैं।
'ग़बन', 'कर्मभूमि', 'गोदान' और 'रंगभूमि' जैसे प्रसिद्ध यथार्थवादी उपन्यासों के रचनाकार मुंशी प्रेमचंद हैं।
शुद्ध रूप 'शृंगार' है। इसमें 'श' के नीचे केवल ऋ की मात्रा (ृ) लगती है, 'र' की मात्रा (्र) नहीं लगती। अधिकांश लोग इसे अशुद्ध लिखते हैं।
जहाँ किसी वस्तु या व्यक्ति का किसी स्थान या आधार से अलग होने का भाव प्रकट होता है, वहाँ अपादान कारक (से विभक्ति) प्रयुक्त होता है।
मिठास एक गुण या अवस्था का बोध कराता है जिसे केवल महसूस किया जा सकता है, देखा या छुआ नहीं जा सकता। अतः यह भाववाचक संज्ञा है।
जहाँ दो वाक्यों या पदों के बीच संबंध स्थापित करने के लिए सर्वनाम का प्रयोग किया जाए, वहाँ संबंधवाचक सर्वनाम होता है।
मूल शब्द 'शासन' के आगे 'अनु' उपसर्ग जोड़ने से 'अनुशासन' शब्द बनता है।
मूल धातु 'लिख' (क्रिया) में 'आवट' भाववाचक प्रत्यय जोड़ने से 'लिखावट' शब्द का निर्माण होता है।
पदक्रम के नियमानुसार 'एक' विशेषण 'माला' के ठीक पहले आना चाहिए न कि 'मोतियों' के पहले, क्योंकि मोती अनेक होते हैं और माला एक होती है।
हिंदी व्याकरण के नियम के अनुसार जिन पुल्लिंग शब्दों के अंत में 'ता' होता है, उनका स्त्रीलिंग बनाने के लिए 'ता' के स्थान पर 'त्री' कर दिया जाता है, जैसे नेता से नेत्री।
इस लोकोक्ति का अर्थ है अत्यधिक कंजूस होना; अर्थात धन बचाने के लिए कष्ट या शारीरिक नुकसान सहने को तैयार रहना पर पैसा खर्च न करना।
यह गुण स्वर संधि का उदाहरण है। नियम के अनुसार 'अ' और 'उ' के मिलने से 'ओ' बनता है। अतः पर + उपकार = परोपकार।
लंबा है उदर (पेट) जिनका अर्थात् भगवान गणेश। जहाँ दोनों पद मिलकर किसी तीसरे विशेष अर्थ (संज्ञा) की ओर संकेत करते हैं, वहाँ बहुव्रीहि समास होता है।
क-वर्ग से लेकर म-वर्ग तक के सभी 25 वर्णों को स्पर्श व्यंजन कहा जाता है, क्योंकि इनके उच्चारण में जीभ मुख के विभिन्न भागों को स्पर्श करती है।
30 मई 1826 को कलकत्ता से प्रकाशित हिंदी के पहले साप्ताहिक पत्र 'उदन्त मार्तण्ड' के संपादक पंडित जुगल किशोर शुक्ल थे।
श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द नियम के अनुसार 'अनल' का अर्थ 'आग' (अग्नि) होता है और 'अनिल' का अर्थ 'हवा' (वायु) होता है।
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