UP Lekhpal Hindi Practice Set Free
उत्तर प्रदेश में राजस्व लेखपाल बनने का सपना देख रहे सभी अभ्यर्थियों का InsuVantage के इस विशेष शिक्षा पोर्टल पर हार्दिक स्वागत है। जैसा कि आप सभी जानते हैं, लेखपाल परीक्षा में सफलता पाने के लिए हर एक विषय का अपना महत्व है, लेकिन सामान्य हिंदी (General Hindi) एक ऐसा ‘स्कोरिंग’ सेक्शन है जो आपकी मेरिट तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है। परीक्षा में हिंदी के पूरे 25 प्रश्न पूछे जाते हैं, और यदि आपकी तैयारी सही दिशा में है, तो आप यहाँ 25 में से 25 अंक आसानी से हासिल कर सकते हैं।
अक्सर छात्र पूरी व्याकरण की किताबें तो रट लेते हैं, लेकिन जब परीक्षा हॉल में कन्फ्यूजिंग विकल्प सामने आते हैं, तो ‘उज्ज्वल’ की सही वर्तनी या ‘तरणि और तरणी’ का अंतर गलत कर बैठते हैं। इसके अलावा, लेखपाल परीक्षा का एक सबसे पसंदीदा और महत्वपूर्ण टॉपिक है— ‘ग्राम्य समाज एवं विकास’ से जुड़ी हिंदी पारिभाषिक शब्दावली, संधि, समास, कारक और लोकोक्तियाँ। इन टॉपिक्स पर मजबूत पकड़ बनाने का एकमात्र तरीका है— लगातार और सटीक प्रश्नों की प्रैक्टिस करना।
इसी बात को ध्यान में रखते हुए, हमने आपके लिए तैयार किया है यह UP Lekhpal Hindi Free Practice Set। इस मॉक टेस्ट में केवल उन्हीं चुनिंदा और अति-महत्वपूर्ण प्रश्नों को शामिल किया गया है, जो यूपीएसएसएससी (UPSSSC) के पिछले 10 वर्षों के पैटर्न पर आधारित हैं और जिनके 2026 की आगामी परीक्षाओं में पूछे जाने की शत-प्रतिशत संभावना है।
इस टेस्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ आपको केवल सही उत्तर ही नहीं मिलेगा, बल्कि हर प्रश्न के नीचे उसकी विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation) भी मिलेगी, ताकि एक प्रश्न को हल करते ही आपके 3 अन्य कॉन्सेप्ट भी क्लियर हो जाएं। तो उठाइए अपनी पेन और कॉप… सॉरी, अपने मोबाइल स्क्रीन को करिए स्क्रॉल और नीचे दिए गए
भाषा की सबसे छोटी लिखित इकाई 'वर्ण' या 'अक्षर' कहलाती है, जबकि मौखिक इकाई 'ध्वनि' होती है।
हिंदी वर्णमाला में मुख्य व्यंजनों की संख्या 33 है और मूल स्वरों की संख्या 11 है। कुल वर्णों की संख्या 52 होती है।
कवि का शुद्ध स्त्रीलिंग 'कवयित्री' होता है। यह वर्तनी शुद्धि में भी बार-बार पूछा जाता है।
सूर्य + उदय = सूर्योदय (अ + उ = ओ)। यहाँ 'गुण स्वर संधि' का नियम लागू होता है।
जिस समास का पहला पद प्रधान या अव्यय (जैसे- यथा) हो, वहाँ 'अव्ययीभाव समास' होता है। यथाशक्ति का अर्थ है शक्ति के अनुसार।
'घर' एक तद्भव शब्द है, जिसका तत्सम रूप 'गृह' होता है। अग्नि, सूर्य और हस्त तत्सम शब्द हैं।
सब कुछ जानने वाले को 'सर्वज्ञ' और कम जानने वाले को 'अल्पज्ञ' कहा जाता है।
'अंधे की लाठी' का अर्थ होता है 'एकमात्र सहारा होना'। जैसे- श्रवण कुमार अपने माता-पिता के लिए अंधे की लाठी थे।
शुद्ध रूप 'उज्ज्वल' है, जिसमें दोनों 'ज' आधे (ज्) होते हैं।
'तरणि' (छोटी इ की मात्रा) का अर्थ 'सूर्य' होता है, जबकि 'तरणी' (बड़ी ई की मात्रा) का अर्थ 'नाव' होता है।
'जंगम' (जो चल सकता हो) का विलोम 'स्थावर' (जो एक जगह स्थिर हो) होता है।
मुख्य रूप से या अर्थ के आधार पर संज्ञा के 5 भेद होते हैं: व्यक्तिवाचक, जातिवाचक, भाववाचक, समूहवाचक और द्रव्यवाचक।
जहाँ किसी वस्तु का किसी स्थान या वस्तु से अलग होने का भाव हो, वहाँ 'अपादान कारक' (से विभक्ति) होता है।
'उत्कर्ष' शब्द में 'उत्' उपसर्ग और 'कर्ष' मूल शब्द है।
घबराना मूल क्रिया में 'आहट' प्रत्यय लगाने से भाववाचक संज्ञा 'घबराहट' बनती है।
सर्वनाम के कुल 6 भेद होते हैं, जबकि हिंदी में कुल सर्वनाम शब्दों की संख्या 11 होती है।
शृंगार रस का स्थायी भाव 'रति' या प्रेम होता है। इसे रसों का राजा (रसराज) भी कहा जाता है।
चौपाई एक सम मात्रिक छंद है, जिसके प्रत्येक चरण में 16-16 मात्राएँ होती हैं।
जहाँ एक ही शब्द दो बार आए और दोनों का अर्थ अलग हो (यहाँ पहला कनक = सोना, दूसरा कनक = धतूरा), वहाँ 'यमक अलंकार' होता है।
'गोदान' और 'गबन' मुंशी प्रेमचंद के सबसे प्रसिद्ध और कालजयी उपन्यास हैं।
हिंदी भाषा 'देवनागरी' लिपि में लिखी जाती है, जो बाएं से दाएं लिखी जाती है।
सुधा, पीयूष और अमिय अमृत के पर्यायवाची हैं, जबकि 'जलज' कमल का पर्यायवाची होता है।
जिसे जीता न जा सके उसे 'अजेय' कहते हैं, और जिसे कभी बुढ़ापा न आए उसे 'अजर' कहते हैं।
'अनुराग' का अर्थ प्रेम होता है और इसका सही विलोम शब्द 'विराग' होता है।
जब कर्ता एक क्रिया को समाप्त करके तुरंत दूसरी क्रिया शुरू करता है, तो पहली क्रिया (खाकर) 'पूर्वकालिक क्रिया' कहलाती है।
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